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पिछले 46 वर्षों में पहली बार 100 से अधिक दिन बाद खेला जाएगा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच

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नई दिल्ली। इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच बुधवार से साउथम्पटन में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच से 117 दिन बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी होगी और यह सीमित ओवरों की क्रिकेट के चलन के बाद पिछले 46 वर्षों में पहला अवसर होगा जबकि 100 से भी अधिक दिन तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला गया।

कोविड-19 महामारी के कारण 15 मार्च 2020 के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ठप्प पड़ा है और अब इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच जैव सुरक्षित वातावरण में खाली स्टेडियमों में इसकी शुरुआत होने जा रही है। इससे पहले आखिरी मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच सिडनी में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय के रूप में खेला गया था।

वनडे और फिर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के आने से बीच बीच में कुछ अवसरों पर टेस्ट मैच 100 से अधिक दिन के अंतराल में खेले गए लेकिन इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सहित विभिन्न घरेलू लीग की शुरुआत के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कभी ऐसा देखने को नहीं मिला था।

इससे पहले 1972 में 114 दिन और 1973 में 113 तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला गया था। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत 5 जनवरी 1971 को हुई थी लेकिन पहले चार वर्षों में केवल 15 मैच खेले गये थे। यही वजह थी कि 19 अगस्त 1971 से 16 फरवरी 1972 तक कोई मैच नहीं खेला गया था। इसका मतलब 181 दिन तक कोई मैच नहीं हुआ जो पिछले 5 दशकों में दो मैचों के बीच सबसे लंबा अंतराल है।

जब तक सीमित ओवरों की क्रिकेट नहीं खेली जाती थी तब दो अंतरराष्ट्रीय मैचों या यूं कहें कि टेस्ट क्रिकेट में दो मैचों के बीच लंबा अंतराल देखने को मिलता था। ऐसा सबसे लंबा अंतराल पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बीच देखने को मिला। पहले विश्व युद्ध के दौरान छह साल नौ महीने और 20 दिन यानि कुल 2485 दिन तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला गया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी 2414 दिन तक कोई मैच नहीं हुआ था।

अगर विश्व युद्ध को छोड़ दें तो 14 अगस्त 1899 से लेकर 13 दिसंबर 1901 तक यानि 851 दिन तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला गया। लेकिन तब दक्षिण अफ्रीका में युद्ध किे कारण वहां खेले जाने वाले टेस्ट मैचों को रद्द किया गया था। टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत में जरूर कई दिनों तक कोई मैच नहीं खेला जाता था। मसलन इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे टेस्ट मैच के बाद तीसरा टेस्ट मैच 642 दिन बाद खेला गया था जबकि तीसरे और चौथे टेस्ट मैच में 613 दिन का अंतराल रहा। फरवरी 1883 से लेकर जुलाई 1884 के बीच 509 दिन तक कोई मैच नहीं खेला गया था।

सीमित ओवरों की क्रिकेट के चलन के कारण हाल में विशेषकर उन वर्षों में 100 से अधिक दिन तक टेस्ट मैच नहीं खेला गया जब वनडे विश्व कप का आयोजन किया गया। जैसे कि पिछले साल इंग्लैंड में विश्व कप खेला गया। इससे पहले खिलाड़ी आईपीएल में व्यस्त रहे और इस कारण दो टेस्ट मैचों के बीच 131 दिन का अंतराल देखने को मिला। वर्तमान में यह अंतराल 130 दिन का है।

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ओलंपिक में पहली बार खेलेंगे 72 भारतीय प्लेयर्स, 14 साल की खिलाड़ी सबसे युवा

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खेलों के महाकुंभ पेरिस ओलंपिक 2024 की शुरुआत 26 अगस्त हो रही है। इस पर सारी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। ओलंपिक में हर देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं। पेरिस ओलंपिक के लिए भारतीय खेल मंत्रालय ने पेरिस ओलंपिक के लिए 117 प्लेयर्स को मंजूरी दी है। इस बार भारत के मेडल की संख्या दोहरे अंक में पहुंचने की पूरी उम्मीद है।

ओलंपिक में पहली बार खेलेंगे 72 एथलीट

ESPN के मुताबिक पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत की तरफ से लगभग 72 एथलीट ओलंपिक में डेब्यू करेंगे और पहली बार ओलंपिक में उतरने जा रहे हैं। पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेने वालों में दो बार की मुक्केबाजी चैंपियन निकहत जरीन, जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियन अंतिम पंघाल और रीतिका हुडा, ज्योति याराजी और सनसनीखेज जैवलिन थ्रोअर किशोर कुमार जेना शामिल हैं। किशोर कुमार जेना से भारत को मेडल की उम्मीदें हैं।

14 साल की धिनिधि हैं सबसे युवा प्लेयर

14 साल की धिनिधि देसिंघु पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सबसे कम उम्र की भारतीय प्लेयर होंगी। वह तैराकी के 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करने वाली हैं। वह भारत की तरफ से ओलंपिक के इतिहास में दूसरी सबसे कम उम्र की प्लेयर हैं। सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी के तौर पर ओलंपिक में भाग लेने का रिकॉर्ड आरती साहा के नाम है। उन्होंने साल 1952 में 11 साल की उम्र में भाग लिया था।

भारत ने टोक्यो ओलंपिक में जीते कुल 7 मेडल

भारत ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में कुल 7 पदक जीते थे, जिसमें नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक भी शामिल था। तब भारत ने ओलंपिक के लिए अपना सबसे बड़ा दल भेजा था। इस बार भी भारत को कुश्ती, बैडमिंटन, जैवलिन थ्रो, शूटिंग और हॉकी में पदकों की उम्मीद है। अभी तक ओलंपिक के इतिहास में भारत ने कुल 10 गोल्ड मेडल जीते हैं, जिसमें से 8 तो अकेले हॉकी से आए हैं। वहीं व्यक्तिगत स्पर्धा में शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने और जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता था।

 

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हॉकी में भारत ने जीते हैं इतने मेडल, इस बार ये खिलाड़ी उतरेंगे मैदान में..

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ओलंपिक खेल एक बार फिर से शुरू होने वाले हैं। अब इसके आगाज में केवल 10 ही दिन का वक्त बाकी है। भारतीय खिलाड़ी फिर से मेडल जीतने की अपनी अपनी तैयारी में जुटे हैं। बात अगर हॉकी की करें तो इस खेल में शुरुआत से ही भारत का परचम लहराया है। 2024 में हरमनप्रीत सिंह के हाथ में हॉकी टीम की कमान है और पूरी टीम काफी मजबूत नजर आ रही है। हॉकी में भारतीय टीम के सफर का आगाज 27 जुलाई से होगा, जब भारतीय टीम न्यूजीलैंड से भिड़ती हुई दिखाई देगी। हम आपको भारत का पूरा शेड्यूल और टीम भी बताएंगे, लेकिन इससे पहले जरा इतिहास पर एक नजर डालते हैं।

भारत का हॉकी में एक वक्त रहा है दबदबा 

हॉकी हमेशा से ओलंपिक में भारत के लिए सबसे मजबूत खेल रहा है। ओलंपिक के इतिहास में भारत इस खेल में सबसे सफल टीम रही है, जिसने कुल आठ स्वर्ण पदक जीते हैं। हालांकि इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि साल 1980 के बाद से इसका दबदबा कभी वैसा नहीं रहा, जैसे पहले होता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में टीम अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर लौट रही है। भारत की पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इस खेल में 41 साल के पदक के सूखे को समाप्त किया था और इस बार उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।

साल 1900 में ही खेला था ओलंपिक 

भारत ने ब्रिटिश शासन के अधीन होने के बावजूद 1900 में ही ओलंपिक में अपनी शुरुआत की और हॉकी में उनका दबदबा 1928 से शुरू हुआ, जब ध्यानचंद टीम के कप्तान थे। उनके नेतृत्व में भारत ने 1928, 1932 और 1936 ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक जीते। स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत का पहला स्वर्ण पदक भी हॉकी में आया, जब बलबीर सिंह सीनियर ने टीम को गौरव दिलाने का काम किया। 1952 और 1956 में भारत ने इस खेल में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हालांकि 1960 के रोम ओलंपिक में भारत फाइनल में पाकिस्तान से हार गया और रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

2021 टोक्यो ओलंपिक में जीता था कांस्य पदक 

इसके बाद भारत 1964 और 1980 में हॉकी में स्वर्ण जीतने में सफल रहा, जबकि अन्य स्पर्धाओं में कांस्य पदक हासिल किया। लेकिन 1980 के बाद यहां पदकों का भारी अकाल पड़ा, लेकिन मनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम ने 5 अगस्त 2021 को टोक्यो में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराया और 41 वर्षों में खेल में देश के लिए पहला पदक जीता।

पेरिस ओलंपिक में भारत का शेड्यूल 
27 जुलाई – भारत बनाम न्यूजीलैंड – रात 9 बजे
29 जुलाई – भारत बनाम अर्जेंटीना – शाम 4:15 बजे
30 जुलाई – भारत बनाम आयरलैंड – शाम 4:45 बजे
1 अगस्त – भारत बनाम बेल्जियम – दोपहर 1:30 बजे
2 अगस्त – भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया – शाम 4:45 बजे

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टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे में भी पाकिस्तान को ‘हराया’, 24 घंटे में दिया दूसरा बड़ा झटका

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टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे में इतिहास रचा है. वो 5 मैचों की T20 सीरीज का पहला मैच गंवाने के बाद उसे 4-1 से जीतने वाली पहली टीम बन गई है. जिम्बाब्वे पर मिली इस कामयाबी के साथ ही टीम इंडिया ने पाकिस्तान को भी हरा दिया है. ये 24 घंटों में भारत के हाथों पाकिस्तान को लगा दूसरा झटका है. अब आप सोच रहे होंगे कि जिम्बाब्वे में जब पाकिस्तान की टीम खेल ही नहीं रही तो वो भारतीय टीम से हार कैसे गई? शुभमन गिल की कप्तानी में जिम्बाब्वे पर सीरीज जीत के साथ पाकिस्तान की इस हार के बारे में बताएं, उससे पहले जरा 24 घंटे में भारत के पाकिस्तान पर मिली पहली जीत के बारे में जान लीजिए. 24 घंटे में भारत से 2 बार हारा पाकिस्तान. इसमें पहली जीत की स्क्रिप्ट जिम्बाब्वे से पहले बर्मिंघम में लिखी गई. जहां वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स के फाइनल में पाकिस्तान को हराते हुए भारतीय टीम चैंपियन बनीं. युवराज सिंह की कप्तानी में भारत के रिटायर क्रिकेटरों की पलटन ने खिताब जीता. भारत को ये शानदार जीत मैदान पर मिली. लेकिन, जिम्बाब्वे में उसे पाकिस्तानियों पर जीत क्रिकेट के आंकड़ों में मिली है.

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