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*7 फरवरी से शुरू होगा वेलेंटाइन वीक, जानिए किस दिन क्या करें*…

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प्यार, मोहब्बत और इश्क का सुहाना महीना शुरू हो गया है। वेलेंटाइन डे से पहले जान लीजिए किस दिन कौन सा स्पेशल डे है… पेश है प्यार करने वालों के लिए प्यार का टाइम टेबल :

7 फरवरी – यह दिन रोज डे के रूप में मनाया जाता है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आप अलग-अलग रंगों के गुलाबों का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे प्यार के लिए लाल और दोस्ती के लिए पीला गुलाब।
8 फरवरी – प्रपोज डे के दिन प्रेमी-प्रेमिकाएं अपने चाहने वालों से प्यार का इजहार करते हैं। अगर आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं तब इस दिन कह डालिए अपनी बात, क्योंकि यह दिन आप ही के लिए बना है।
9 फरवरी – इसे चॉकलेट डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आप अपने प्यार को चॉकलेट देकर अपने संबंधों में मिठास से भर सकते हैं।

10 फरवरी – टेडी डे, जिसमें टेडी टॉयज देने के बहाने भी आप प्यार को और गहरा कर सकते हैं।
11 फरवरी – प्रॉमिस डे, सच्चे प्रेमी प्रॉमिस डे पर एक-दूसरे से प्यार निभाने का वादा करते हैं।
12 फरवरी – किस डे, इस दिन सच्चे प्रेमी-प्रेमिका किस के जरिए अपना प्यार जताते हैं।
13 फरवरी – हग डे, इस दिन अपने साथी को दें एक जादू की झप्पी और उन्हें एहसास दिलाएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं।
14 फरवरी – वेलेंटाइन डे, प्यार करने वालों के लिए सबसे बड़ा दिन जिसे संत वेलेंटाइन की याद में मनाया जाता है। इस दिन आप अपने प्यार के साथ सारा दिन बिता सकते हैं, उन्हें ब्यूटीफुल गिफ्ट्स दे सकते हैं।

15 फरवरी – इस दिन जरा संभल कर रहें, क्योंकि स्लैप डे है।
16 फरवरी – इस दिन को किक डे के रूप में मनाया जाता है, अपने प्रिय को प्यार से किक करें और लीजिए खट्टी-मीठी नोक-झोंक का मजा।
17 फरवरी – परफ्यूम डे, इस दिन फूलों और इत्र भेंट कर प्यार की खुशबू का मजा लें।
18 फरवरी – फ्लर्टिंग डे, प्यार के साथ फ्लर्ट करने का मजा ले सकते हैं।
19 फरवरी – कन्फेशन डे इस दिन अपनी सारी गलतियों को अपने प्रिय के सामने कन्फेस करें और उन गलतियों को न दोहराने का वादा करें। इससे आपके संबंध और मजबूत हो जाएंगे।

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कीचड़ में स्टंट कर रहा था लड़का, मिट्टी में धंसी गर्दन, लगा छटपटाने…

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लोग मजाक-मजाक में कई बार ऐसी खतरनाक हरकतें करने लग जाते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है. ऐसा ही एक खौफनाक वीडियो इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि नदी किनारे एक लड़का गुलाटी मारने की कोशिश कर रहा है. वह दौड़ता हुआ कीचड़ में आता है. हाथों को नीचे रखकर सिर को मिट्टी के अंदर डालकर पलटने की कोशिश करता है, लेकिन तभी उसकी गर्दन मिट्टी के अंदर धंस जाती है. वह तड़पने लगता है. दूसरी ओर उसका दोस्त वीडियो बनाने में मशगूल रहता है.बता दें कि नदी किनारे कई बार दल-दली मिट्टी जमा हो जाती है, जिसमें लोग इस तरह के स्टंट को परफॉर्म करते हैं. इस वीडियो में भी ये लड़का कुछ ऐसा ही करने की कोशिश करता है. लेकिन स्टंट के दौरान उसकी गर्दन मिट्टी में पूरी तरह धंस जाती है और हाथ से बाहर निकालने में सपोर्ट भी नहीं मिल पाता. ऐसे में लड़का तड़पने लगता है. वीडियो देखकर साफ कहा जा सकता है कि एक पल की देरी का मतलब सीधे इस शख्स की जान चली जाती. लेकिन वीडियो बनाने वाले ने कैमरा बंद करना उचित नहीं समझा.

हालांकि, थोड़ी देर में ही लड़के का दूसरा दोस्त उसे बचाने के लिए पहुंच जाता है, लेकिन तब तक अपने लड़के का सिर बाहर निकल जाता है. लड़का पूरी तरह कीचड़ में सना रहता है. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @dontlough8001 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. अब तक इसे 30 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है, वहीं सैकड़ों कमेंट्स आए हैं. एक यूजर ने लिखा है कि वीडियो बनाने की जगह कैमरामैन को उस लड़के की मदद करनी चाहिए थी. वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा है कि रील के चक्कर में जान गंवा देता. वहीं, एक दूसरे यूजर ने अपने कमेंट में लिखा है कि इसे कहते हैं मौत को छू कर टक से वापस आना.

भूलकर भी न करें ऐसा स्टंट

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8 अप्रैल को लगने जा रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें सूतक काल लगेगा या नहीं?

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 इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल 2024 को लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार 8 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर देर रात 2 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण का कुल पर्वकाल 5 घंटे 10 मिनट का रहेगा। बता दें कि ग्रहण के दौरान लगने वाला सूतक काल का विशेष महत्व रखता है। सूतक काल के समय कई शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे या 9 घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाता है, जिसमे सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण समय से 12 घंटे पहसे शुरू हो जाता है। सूतक काल को एक प्रकार से अशुभ समय माना जाता हैं। ऐसे में सूतक काल के दौरान कोई मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। इस ग्रहण का सूतक काल 8 अप्रैल 2024 सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर ही शुरू हो जाएगा।

सूतक काल लगेगा या नहीं? 

साल का पहला सूर्य ग्रहण रात में लगने जा रहा है, इसलिए यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में सूर्य ग्रहण नहीं लगने की वजह से सूतक काल भी पूरी तरह से मान्य नहीं होगा। गौरतलब है कि यह सूर्य ग्रहण अमेरिका, ग्रीनलैण्ड, आइसलैण्ड, ओजेरस, पोलेनेशि, उत्तरी अमेरिका के दक्षिण प्रशांत महासागर और उत्तर अटलांटिक महासागर आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए

  • ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं अपना खास ध्यान रखें
  • ग्रहण के समय सुई में धागा नहीं डालना चाहिए, साथ ही इस दौरान न कुछ छीले, बघारे, काटे और न छौंके
  • सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्यदेव का मंत्र जाप करें
  • ग्रहण के पहले पानी के बर्तन में, दूध और दही में कुश या तुलसी की पत्ती या दूब धोकर डाल दें
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद दूब को निकालकर फेंक देना दें
  • सूर्य ग्रहण को कभी भी डायरेक्ट आंखों से न देखें
  • ग्रहण के दौरान नाखून काटना, दांतों को साफ, बाल में कंघी करना, करना वर्जित माना गया है

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30 मार्च को मनाई जाएगी देवताओं की होली, द्वापर युग में ऐसे हुई थी रंग पंचमी की शुरूआत

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रंग पंचमी का त्योहार साल 2024 में 30 मार्च को है। पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को देवताओं की होली मनाई जाती है और यही वजह है कि इसे रंग पंचमी का नाम दिया गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी देवता धरती पर होली खेलने आते हैं। देवताओं की होली से जुड़ी कथा क्या है, और कैसे रंग पंचमी के त्योहार की शुरूआत हुई थी इसके बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।

रंग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा 

द्वापर युग में भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार लिया था। माना जाता है कि, भगवान कृष्ण ने ही रंग पंचमी की शुरुआत की थी। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान कृष्ण ने राधा जी के साथ होली खेली थी। भगवान कृष्ण और राधा जी को होली के रंगों में रंगा देखकर गोपियां भी शामिल हो गईं। राधा-कृष्ण की होली से धरती पर एक अद्भुत छटा बिखने लगी, जिसे देखकर देवी-देवता भी मंत्रमुग्ध हो गए। देवी-देवता भी राधा-कृष्ण के साथ होली खेलना चाहते थे और इसीलिए वो भी गोपी और ग्वालों का रूप धारण करके राधा-कृष्ण की टोली में शामिल हो गए। यानि धरती पर सारे देवी-देवताओं ने राधा-कृष्ण के साथ होली मनाई। यही वजह है कि रंग पंचमी को देवताओं की होली कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, आज भी रंग-पंचमी के दिन देवी-देवता धरती पर राधा-कृष्ण के साथ होली मनाने पहुंचते हैं।

रंग पंचमी पर ये कार्य करना शुभ

रंग पंचमी को लेकर कहा जाता है कि इस दिन हवा में गुलाल उड़ाने से वातावरण की नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही समाज में सौहार्द बना रहता है। इस दिन देवी-देवताओं खासकर भगवान कृष्ण की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त हो सकते हैं। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अतिउत्तम कहा गया है, साधकों को इस दिन अपने इष्ट की साधन अवश्य करनी चाहिए। इस दिन किये गये ध्यान से आपको मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। जो लोग आध्यात्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं उनको कुछ ऐसे अनुभव इस दिन हो सकते हैं जिससे उनकी आध्यात्मिक यात्रा आसान हो सकती है। मान्यताओं के अनुसार, क्योंकि इस दिन देवी-देवता धरती पर आते हैं इसलिए उनकी आराधना करके भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति शीघ्र हो सकती है।

 

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