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वर्षा काल में नदियों के जल स्तर पर सतत् निगरानी रखें: अपर मुख्य सचिव शर्मा

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रायपुर, 26 जून 2024 : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन पर छत्तीसगढ़ में बाढ़ नैसर्गिक विपत्तियों से निपटने हेतु गठित उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में बरसात के मौसम में राज्य के विभिन्न स्थानों पर बाढ़ आने पर उससे निपटने की तैयारियों के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। बाढ़ के दौरान राहत शिविरों की व्यवस्था सहित विभिन्न विभागों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही एवं तैयारियों के संबंध विस्तृत चर्चा हुई।अपर मुख्य सचिव श्रीमती शर्मा ने कहा है कि नगरीय क्षेत्रों में जर्जर भवनों की निगरानी लगातार की जाए। इन भवनों में निवासरत लोगों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से बसाए जाने की भी व्यवस्था की जाए। ऐसे जिले जहां बड़ी नदियां बहती है वहां पर जल स्तर पर बराबर नजर रखी जाए। जल स्तर के खतरे के निशान पर पहुंचने की संभावना होने पर इसकी पूर्व सूचना राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष तथा निचले जिलों को लगातार देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसी तरह से बड़े जलाशयों पर कंट्रोल रूम स्थापित कर जल स्तर की जानकारी समय-समय पर शासन को उपलब्ध करायी जाए।  बांधों का जल स्तर बढ़ने पर जल निकासी हेतु निचले जिलों एवं सीमावर्ती राज्यों को 12 घण्टे पूर्व सूचना दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं प्रदेश में कमजोर हो चुके पुल-पुलियों एवं ईमारतों की पहचान कर मरम्मत कर ली जाए। साथ ही बाढ़ के समय दुर्घटना जन्य स्थलों पर सूचना फलक और बेरियर आदि की व्यवस्था करने कहा गया है।

राज्य एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में इस माह में मानसून सक्रिय होने की संभावना है। इसलिए सभी जिलों में वर्षा की जानकारी संकलित की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना भी की गई है। इसका दूरभाष क्रमांक 0771-2223471 एवं फैक्स क्रमांक 0771-2223472 है। इसके अतिरिक्त बाढ़ नियंत्रण कक्ष से 0771-2221242 दूरभाष पर भी सम्पर्क किया जा सकता है। जिला स्तर पर भी बाढ़ नियंत्रण कक्षों की स्थापना की गई है। बैठक में बताया गया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पहुंचविहीन क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, नमक, केरोसिन, जीवन रक्षक दवाईयां, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा दलों का गठन सहित अन्य जरूरी सामग्री संग्रहित करने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दे दिए गए है।

बरसात के दिनों में पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई एवं वहां पर ब्लिचिंग पावडर की व्यवस्था करने के निर्देश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दिए गए है। इसी प्रकार से ऐसे क्षेत्रों की चिन्हांकन कर ली जाए जहां प्रतिवर्ष बाढ़ आती है। इन क्षेत्रों में सतत् निगरानी रखने एवं अवश्यकता पड़ने पर वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके ठहरने के लिए राहत शिविर आदि की समुचित योजना बनाने के निर्देश दिए गए है। बाढ़ से बचाव संबंधित उपकरणों की मरम्मत करने और जिन जिलों में मोटरबोट उपलब्ध है, उनकी जानकारी शीघ्र ही राहत आपदा नियंत्रण कार्यालय को दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा के अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने कहा गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों को नगरीय क्षेत्रों में नालियों की साफ-सफाई बरसात के दिनों में निरंतर कराये जाने कहा गया है।

उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, गृह विभाग के सचिव श्री अरूण गौतम, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव श्री चंदन कुमार, विशेष सचिव कृषि श्री सारांश मित्तर और गृह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक निर्माण, वित्त विभाग, जल संसाधन, ऊर्जा, जनसम्पर्क, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, नगरीय प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा, रेल्वे, दूरदर्शन, रेडक्रास सोसायटी, मौसम विज्ञान एवं भारत दूरसंचार निगम के अधिकारी उपस्थित थे।

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स्कूल रेडिनेस के तहत खेल-खेल में सीखने का हुआ प्रशिक्षण

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एनसीईआरटी के अधिकारी हुए वर्चुअली शामिल

 

स्कूल रेडीनेस’ कार्यक्रम

 रायपुर, 17 जुलाई 2024 : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत ‘स्कूल रेडीनेस’ कार्यक्रम- ग्रेड 1 के बच्चों के लिए 3 माह का खेल आधारित शाला तैयारी के कक्षा संचालन, शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में वर्तमान शिक्षा सत्र हेतु  पढ़ाने वाले शिक्षकों के 4 दिवसीय वर्चुअल प्रशिक्षण एससीईआरटी छत्तीसगढ़ रायपुर के संचालक, श्री राजेंद्र कुमार कटारा के मार्गदर्शन में  दिया गया। बच्चे खेल-खेल में 3 माह में सीखेंगे और साथ ही उनका सर्वांगीण विकास होगा।

इस प्रशिक्षण में मुख्य रूप से तीन लक्ष्य पर प्रकाश डाला गया जिस पर बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली को बनाए रखना, बच्चों में प्रभावशाली संप्रेषण बनना और बच्चों को सीखने के प्रति उत्साह और पर्यावरण से जुड़ाव की बातें कही गई है …

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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों के विवाह की चिंता हुई दूर,रायगढ़ में 45 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में

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 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों के विवाह की चिंता हुई दूर

 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों के विवाह की चिंता हुई दूर

  रायपुर, 17 जुलाई 2024 : मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को होने वाली आर्थिक परेशानियों को दूर करना, शादी के मौके पर फिजुलखर्ची को रोकना, सामूहिक विवाह के आयोजन से सामाजिक स्थिति में सुधार लाना है। गतदिवस को रायगढ़ जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 45 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। शासन की ओर से प्रत्येक जोड़े को कन्या के नाम से 35 हजार रूपये की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की गई। उपहार के रूप में बैग, श्रृंगार सामाग्री, कपड़े इत्यादि वर-वधु को दिया गया तथा जोड़ों को विवाह प्रमाण पत्र दिया गया।

इनमें से गोपालपुर, बोईरदादर की निवासी श्रीमती देवंती सिदार ने  और भगवानपुर निवासी श्रीमती भारती ने बताया कि उनकी शादी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 16 जुलाई 2024 को हुई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उनका पंजीयन किया गया और इस योजना का लाभ मिला। उन्होंने बताया कि वे अभी अपने अपने पति के साथ बेहद खुश है। गरीबी के कारण परिवार वालों के लिए शादी कराना बहुत बड़ी चुनौती थी पर इस योजना के चलते यह चुनौती आसानी से हल हो गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवम् बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े को धन्यवाद देते हुए हितग्राहियों कहा कि इस योजना ने हमारे माता-पिता के आर्थिक बोझ को कम कर धूमधाम से विवाह करने समर्थ बना दिया।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। महतारी वंदन योजना, महतारी जतन योजना, इनमें से और एक योजना है, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना। इस योजना के तहत सरकार द्वारा उन लोगों को सहायता प्रदान किया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे परिवार की बेटियों को इस योजना का लाभ दिया जाता है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों को विवाह के लिए सरकार सहायता राशि प्रदान करती है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कमजोर, आर्थिक परिस्थितियों वाले परिवारों की बेटियों के हाथ पीले कर माता-पिता के आर्थिक बोझ को कम कर रही है, जिनके घर में बेटियां होती है, उनके माता-पिता को बेटी की शादी योग्य उम्र होते ही चिंता सताने लगती है। हर मां-बाप का सपना होता है कि उनकी बेटी की शादी धूमधाम से हो, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण सपना अधूरा रह जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से हजारों परिवारों के माता-पिता के आर्थिक बोझ को कम कर उनकी चिंता दूर कर रही है।

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 उपमुख्यमंत्री शर्मा के निर्देश पर कबीरधाम जिले में जलस्त्रोतों का क्लोरिनेशन और स्वच्छता अभियान शुरू

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निजी जल स्त्रोतों का क्लोरिनेशन और स्वच्छता अभियान शुरूनिजी जल स्त्रोतों का क्लोरिनेशन और स्वच्छता अभियान शुरू

  रायपुर, 17  जुलाई 2024 : कबीरधाम जिले में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर सभी सार्वजनिक और निजी जल स्त्रोतों का क्लोरिनेशन और स्वच्छता अभियान शुरू हो गया है। जिले के सभी सार्वजनिक एवं निजी जल स्त्रोतों की स्वच्छता के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और पीएचई विभाग इस कार्य मे लग गए हैं। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध और निर्मल पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

जिले के विकासखण्डों में कुल 13,538 जल स्त्रोतों, जिसमें कुएं, हैण्डपंप, सोलर पंप आदि शामिल हैं, का क्लोरिनेशन किया जा रहा है। इस अभियान के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा और आदिवासी बाहूल्य क्षेत्रों में भी स्वच्छता कार्य किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर ने इस कार्य के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य अमला और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को संयुक्त रूप से जिम्मेदारी दी है।

इसके लिए जिले के सभी विकासखण्डों में पांच-पांच दल गठित किए गए हैं, जो क्लोरिनेशन का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग और ग्राम स्तर पर मितानिनों को भी इस कार्य में शामिल किया गया है।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने मौसमी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों के जल स्त्रोतों की क्लोरिनेशन और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पंचायत की टीम द्वारा विशेष कार्य किया जाना चाहिए।इस अभियान से जिले के ग्रामीणों को शुद्ध और निर्मल पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आएगी। इसके लिए कलेक्टर को सभी संबंधित अधिकारियों का नियमित मॉनिटरिंग और अभियान की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

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