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Covid 19 महामारी के बाद खेल फिर से शुरू होगा तो ये 3 चीजें रहेंगी बरकरार

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किसी समय भारतीय क्रिकेट की ‘दीवार’ समझे जाने वाले दिग्गज क्रिकेटर राहुल द्रविड़ का ऐसा मानना है कि कोविड महामारी के बाद जब खेल फिर से शुरू होंगे तो खिलाड़ियों के दिल और दिमाग में 3 चीजें लंबे समय तक बरकरार रहेंगी। ये तीन चीजें होंगी ‘संदेह, संकोच और भय की भावना’।

कोरोना वायरस महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक से लेकर दुनिया की सबसे लोकप्रिय इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को रद्द या स्थगित करना पड़ा है। अब जबकि सरकार ने बिना दर्शकों के खेल आयोजित करने की स्वीकृति दी है, तो जाहिर है इस पर कई तरह के सवाल खड़े होंगे।

इस बार में राहुल द्रविड़ का मानना है कि खेल शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए खिलाड़ियों के मन में संदेह या भय हो सकता है। मुझे यकीन है कि जब फिर से खेल शुरू होगा तो निश्चित तौर पर हिचकिचाहट होगी।

तकनीकी रूप से इस खेल के सबसे अच्छे बल्लेबाजों में शामिल रहे द्रविड़ ने कहा, व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि यह बड़ी ज्यादा परेशानी होगी। मुझे नहीं लगता है कि एक बार शीर्ष खिलाड़ी जब मैदान पर उस चीज के लिए उतरेंगे जिससे वह प्यार करते है तो उन्हें परेशानी होगी।

द्रविड़ ने कहा, बहुत से खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी चुनौती यह होगी कि जब वे दो या तीन महीनें तक नहीं खेलेंगे तो अपने शरीर पर विश्वास रखेंगे की नहीं। द्रविड़ ने कहा कि शीर्ष स्पर्धाओं में प्रतिस्पर्धा करने से पहले खिलाड़ियों को फिटनेस हासिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, फिर से मैच फिटनेस, खेल के लिए जरूरी फिटनेस के लिए थोड़ा समय चाहिए होगा। फिटनेस हासिल करने के बाद ही खिलाड़ी आत्मविश्वास से खुद पर भरोसा कर सकते हैं।’

फिलहाल जहां भी दर्शकों की गैर मौजूदगी में उनके स्थान पर दर्शकदीर्घा में पुतले बैठाकर मैच करवाएं हैं, उसके सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। यूरोप की टॉप 5 लीग में शामिल म्युनिख में बुंदेसलिगा शनिवार से प्रारंभ हो गई लेकिन यहां करीब ढाई महीने पहले जैसा उत्साह इसलिए नजर नहीं आया क्योंकि दर्शक ही नहीं थे।

दर्शकों का समर्थन खिलाड़ियों में हमेशा नया जोश पैदा करता है, लेकिन वो यहां कहीं दिखाई नहीं दिया। कोरोना की मार ने खेल पर कैसा असर डाला, इसकी एक बानगी भी देख लीजिए। बुंदेसलिगा में फुटबॉल खिलाड़ी पूरे 90 मिनट भी मैदान नहीं खेल पा रहे थे और उन्हें 70 मिनट में ही मांसपेशियों में खिंचाव आ रहा है और वे इंजुरी से जूझते दिखाई दे रहे हैं।

इतने लंबे ब्रेक ने खिलाड़ियों की फिटनेस को प्रभावित किया है। कोरोना ने खेल पर तो असर डाला ही है साथ ही साथ इसे कवर करने वाले पत्रकारों और टीवी रिपोर्टरों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी है। मैच के बाद टेलीविजन रिपोर्टर को स्टिक में माइक्रोफोन लगाकर दूर से खिलाड़ियों और मैनेजर का साक्षात्कार लेना पड़ रहा है, वह भी माइक्रोफोन को प्लास्टिक से कवर करने के बाद।

गोल करने के बाद खिलाड़ी पहले गले मिलकर जश्न मनाते थे या फिर गोल करने वाले खिलाड़ी पर गिर पड़ते थे लेकिन बुंदेसलिगा में यह नजारा नहीं दिखाई दे रहा है। गोल दागने के बाद खिलाड़ी कोहनी मिला रहे हैं और ‘थम्सअप’ का साइन देकर चेयरअप कर रहे हैं।

यही नहीं, सपोर्टिग स्टाफ भी हाथ मिलाने के बजाय पैर मिलाकर एक दूसरे को बधाई देते हैं। असल में कोरोना के खतरे ने खेल का नूर ही गायब कर दिया है। न गोल मारने वाला जोश दिखाता है और न ही टीम के साथी पहले जैसा जश्न मनाते हैं। इस स्थिति को बदलने कितना वक्त लगेगा, कोई नहीं जानता।

आईपीएल के लिए दलील दी जा रही है कि भविष्य में इसका आयोजन तो संभव है लेकिन दर्शकों के बिना… आईपीएल का तमाशा दर्शकों के हुजूम के बिना अधूरा रहेगा।

दर्शक, धूमधड़ाका, शोर, यही तो आईपीएल की पहचान है। टीमों के समर्थकों का स्टेडियम में खिलाड़ियों में रोमांच भरना बीते 12 बरसों से देखना आदत सी बन गई है। फिर कैसे संभव है कि मैच में दर्शकों की जगह पुतले हो? क्या ये सब मजाक बनकर नहीं रह जाएगा?

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ओलंपिक में पहली बार खेलेंगे 72 भारतीय प्लेयर्स, 14 साल की खिलाड़ी सबसे युवा

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खेलों के महाकुंभ पेरिस ओलंपिक 2024 की शुरुआत 26 अगस्त हो रही है। इस पर सारी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। ओलंपिक में हर देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं। पेरिस ओलंपिक के लिए भारतीय खेल मंत्रालय ने पेरिस ओलंपिक के लिए 117 प्लेयर्स को मंजूरी दी है। इस बार भारत के मेडल की संख्या दोहरे अंक में पहुंचने की पूरी उम्मीद है।

ओलंपिक में पहली बार खेलेंगे 72 एथलीट

ESPN के मुताबिक पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत की तरफ से लगभग 72 एथलीट ओलंपिक में डेब्यू करेंगे और पहली बार ओलंपिक में उतरने जा रहे हैं। पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेने वालों में दो बार की मुक्केबाजी चैंपियन निकहत जरीन, जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियन अंतिम पंघाल और रीतिका हुडा, ज्योति याराजी और सनसनीखेज जैवलिन थ्रोअर किशोर कुमार जेना शामिल हैं। किशोर कुमार जेना से भारत को मेडल की उम्मीदें हैं।

14 साल की धिनिधि हैं सबसे युवा प्लेयर

14 साल की धिनिधि देसिंघु पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सबसे कम उम्र की भारतीय प्लेयर होंगी। वह तैराकी के 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करने वाली हैं। वह भारत की तरफ से ओलंपिक के इतिहास में दूसरी सबसे कम उम्र की प्लेयर हैं। सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी के तौर पर ओलंपिक में भाग लेने का रिकॉर्ड आरती साहा के नाम है। उन्होंने साल 1952 में 11 साल की उम्र में भाग लिया था।

भारत ने टोक्यो ओलंपिक में जीते कुल 7 मेडल

भारत ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में कुल 7 पदक जीते थे, जिसमें नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक भी शामिल था। तब भारत ने ओलंपिक के लिए अपना सबसे बड़ा दल भेजा था। इस बार भी भारत को कुश्ती, बैडमिंटन, जैवलिन थ्रो, शूटिंग और हॉकी में पदकों की उम्मीद है। अभी तक ओलंपिक के इतिहास में भारत ने कुल 10 गोल्ड मेडल जीते हैं, जिसमें से 8 तो अकेले हॉकी से आए हैं। वहीं व्यक्तिगत स्पर्धा में शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने और जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता था।

 

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हॉकी में भारत ने जीते हैं इतने मेडल, इस बार ये खिलाड़ी उतरेंगे मैदान में..

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ओलंपिक खेल एक बार फिर से शुरू होने वाले हैं। अब इसके आगाज में केवल 10 ही दिन का वक्त बाकी है। भारतीय खिलाड़ी फिर से मेडल जीतने की अपनी अपनी तैयारी में जुटे हैं। बात अगर हॉकी की करें तो इस खेल में शुरुआत से ही भारत का परचम लहराया है। 2024 में हरमनप्रीत सिंह के हाथ में हॉकी टीम की कमान है और पूरी टीम काफी मजबूत नजर आ रही है। हॉकी में भारतीय टीम के सफर का आगाज 27 जुलाई से होगा, जब भारतीय टीम न्यूजीलैंड से भिड़ती हुई दिखाई देगी। हम आपको भारत का पूरा शेड्यूल और टीम भी बताएंगे, लेकिन इससे पहले जरा इतिहास पर एक नजर डालते हैं।

भारत का हॉकी में एक वक्त रहा है दबदबा 

हॉकी हमेशा से ओलंपिक में भारत के लिए सबसे मजबूत खेल रहा है। ओलंपिक के इतिहास में भारत इस खेल में सबसे सफल टीम रही है, जिसने कुल आठ स्वर्ण पदक जीते हैं। हालांकि इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि साल 1980 के बाद से इसका दबदबा कभी वैसा नहीं रहा, जैसे पहले होता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में टीम अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर लौट रही है। भारत की पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इस खेल में 41 साल के पदक के सूखे को समाप्त किया था और इस बार उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।

साल 1900 में ही खेला था ओलंपिक 

भारत ने ब्रिटिश शासन के अधीन होने के बावजूद 1900 में ही ओलंपिक में अपनी शुरुआत की और हॉकी में उनका दबदबा 1928 से शुरू हुआ, जब ध्यानचंद टीम के कप्तान थे। उनके नेतृत्व में भारत ने 1928, 1932 और 1936 ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक जीते। स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत का पहला स्वर्ण पदक भी हॉकी में आया, जब बलबीर सिंह सीनियर ने टीम को गौरव दिलाने का काम किया। 1952 और 1956 में भारत ने इस खेल में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हालांकि 1960 के रोम ओलंपिक में भारत फाइनल में पाकिस्तान से हार गया और रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

2021 टोक्यो ओलंपिक में जीता था कांस्य पदक 

इसके बाद भारत 1964 और 1980 में हॉकी में स्वर्ण जीतने में सफल रहा, जबकि अन्य स्पर्धाओं में कांस्य पदक हासिल किया। लेकिन 1980 के बाद यहां पदकों का भारी अकाल पड़ा, लेकिन मनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम ने 5 अगस्त 2021 को टोक्यो में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराया और 41 वर्षों में खेल में देश के लिए पहला पदक जीता।

पेरिस ओलंपिक में भारत का शेड्यूल 
27 जुलाई – भारत बनाम न्यूजीलैंड – रात 9 बजे
29 जुलाई – भारत बनाम अर्जेंटीना – शाम 4:15 बजे
30 जुलाई – भारत बनाम आयरलैंड – शाम 4:45 बजे
1 अगस्त – भारत बनाम बेल्जियम – दोपहर 1:30 बजे
2 अगस्त – भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया – शाम 4:45 बजे

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टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे में भी पाकिस्तान को ‘हराया’, 24 घंटे में दिया दूसरा बड़ा झटका

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टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे में इतिहास रचा है. वो 5 मैचों की T20 सीरीज का पहला मैच गंवाने के बाद उसे 4-1 से जीतने वाली पहली टीम बन गई है. जिम्बाब्वे पर मिली इस कामयाबी के साथ ही टीम इंडिया ने पाकिस्तान को भी हरा दिया है. ये 24 घंटों में भारत के हाथों पाकिस्तान को लगा दूसरा झटका है. अब आप सोच रहे होंगे कि जिम्बाब्वे में जब पाकिस्तान की टीम खेल ही नहीं रही तो वो भारतीय टीम से हार कैसे गई? शुभमन गिल की कप्तानी में जिम्बाब्वे पर सीरीज जीत के साथ पाकिस्तान की इस हार के बारे में बताएं, उससे पहले जरा 24 घंटे में भारत के पाकिस्तान पर मिली पहली जीत के बारे में जान लीजिए. 24 घंटे में भारत से 2 बार हारा पाकिस्तान. इसमें पहली जीत की स्क्रिप्ट जिम्बाब्वे से पहले बर्मिंघम में लिखी गई. जहां वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स के फाइनल में पाकिस्तान को हराते हुए भारतीय टीम चैंपियन बनीं. युवराज सिंह की कप्तानी में भारत के रिटायर क्रिकेटरों की पलटन ने खिताब जीता. भारत को ये शानदार जीत मैदान पर मिली. लेकिन, जिम्बाब्वे में उसे पाकिस्तानियों पर जीत क्रिकेट के आंकड़ों में मिली है.

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