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सेहत

शरीर में हैप्पी हार्मोन डोपामाइन को बढ़ा देती हैं ये आदतें, दिल और दिमाग रहेगा एकदम खुश

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हमारे मन, दिल और शरीर को खुश रखने में कई तरह के न्यूरोट्रांसमीटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में से एक है डोपामाइन, जो शरीर में नेचुरली बनता है। ये न्यूरोट्रांसमीटर हमारे तंत्रिका तंत्र और कोशिकाओं के बीच मैसेज भेजता है। जैसे हम कैसे हैप्पी फील करते हैं। इसमें डोपामाइन की भूमिका होती है। अगर शरीर में डोपामाइन हार्मोन की कमी होने लगे तो इससे हमारी पूरी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है। डोपामाइन की वजह से हम खुश फील करते हैं। मार्केट में कई दवाएं और सप्लीमेंट्स मिलते हैं जो डोपामाइन के लेवल को बढ़ाने में मदद करते हैं। शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ भुमेश त्यागी के मुताबिक आप कुछ आदतों से भी शरीर में हैप्पी हार्मोंन डोपामाइन को बढ़ा सकते हैं। जानिए कैसे?

व्यायाम करें- रोजाना व्यायाम करना शरीर और दिमाग दोनों के लिए अच्छा साबित होता है। व्यायाम करने से शरीर में नेचुरली डोपामाइन और एंडोर्फिन हार्मोंन्स का लेवल बढ़ता है। जिससे मूड अच्छा होता है। एक्सरसाइज करने से आपको खुशी मिलती है और स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। इसलिए वर्कआउट को डेली रुटीन का हिस्सा बना लें।

धूप है जरूरी- जब आप धूप से पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी लेते हैं तो इससे डोपामाइन रिलीज होता है। सुबह की धूप लेने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनता है। जब आप सूरज की रोशनी में रहते हैं तो डोपामाइन बढ़ने लगता है। इसलिए सुबह धूप में वॉक करने की सलाह दी जाती है।

संगीत सुनें- डोपामाइन अलग-अलग लोगों में अलग-अलग आदतों से रिलीज हो सकता है। कुछ लोगों को अच्छा संगीत सुनने से खुशी मिलती है और जब वो आनंदित महसूस करते हैं तो शरीर में डोपामाइन हार्मोन रिलीज होता है। कई रिसर्च में ये सामने आ चुका है कि म्यूज़िक हेल्थ और खासतौर से मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। म्यूजिक सुनने से शरीर में डोपामाइन रिलीज होता है।

अच्छी नींद- नींद का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है तो पर्याप्त नींद और भरपूर आराम जरूरी है। अच्छी नींद लेने से डोपामिन का लेवल बढ़ता है। इससे बॉडी रिलेक्स रहती है। कई रिसर्च में ये सामने आया है कि नींद पूरी नहीं होने पर डोपामाइन रिसेप्टर्स की कार्यक्षमता कम होने लगती है। जिससे मूड संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं।

 

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Health Benefits of Eating Dates : ऐसे खाएंगे खजूर तो शरीर को मिलेंगे फायदे ही फायदे

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काजू बादाम की तरह खजूर भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। इसका नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व आपके शरीर को कई बीमारियों से दूर रखते हैं। खजूर में मौजूद, कैल्शियम, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन बी6 और आयरन आपके शरीर की सेहत लिए बेहद ज़रूरी पोषक तत्व हैं। चलिए आपको बताते हैं खजूर खाने से आपको क्या फायदे होंगे। साथ ही इसे कब और कैसे खाना चाहिए?

कब और कैसे खाएं?

पोषक तत्वों से भरपूर खजूर आपकी सेहत को दुरुस्त कर सकता है।अगर आप सुबह के समय इसे खाली पेट खाते हैं तो इसके फायदे की लिस्ट और भी बढ़ जाएगी। कई लोग खजूर को बिना भिगोए ही खाते हैं। आपको बता दें खजूर को भिगोकर खाने से आपकी सेहत को ज़्यादा फायदा होंगे।

सुबह के समय खजूर खाने के फायदे

  • खजूर में ग्लूकोज, फ्रक्टोज और सुक्रोज काफी मात्रा में पाया जाता है। इसलिए अगर आप डाउन फील कर रहे हैं तो इंस्टेंट एनर्जी के लिए आप सुबह के समय खाली पेट खजूर का सेवन करें। दो से चार खजूर खाने से भी आपको तुरंत ही एनर्जी मिल जाएगी।
  • रोज़ाना सुबह के समय खाली पेट खजूर खाने से हमार इम्यून सिस्टम मजबूत होगा। इसमें मौजूद कैल्शियम, आयरन, विटामिन, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे गुण आपकी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
  • खजूर में कॉपर, सेलेनियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसमें मौजूद विटामिन K खून को गाढ़ा होने से रोकता है और हड्डियों को मेटाबोलाइज्ड करने में मदद करता है।
  • उन लोगों को ज़रूर खजूर खाना चाहिए जिनका हीमोग्लोबिन लेवल कम होता है। इसमें भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। अगर आपके शरीर में भी खून की कमी हो गई है तो आप एनीमिया का शिकार हो सकते हैं इसलिए आप डेली खजूर खाएं।

एक दिन में कितना खाएं?

एक खजूर से 23 कैलोरी होती है इसलिए ग्लूकोज और फ्रुक्टोज का खजाना खजूर डायबिटीज में सहायक होने के साथ ही इम्यून पावर को भी बूस्ट करता है। आप रोज़ाना 3 से 4 खजूर का सेवन करें।  एक दिन में इतना खजूर खाने से आपको सेहत से जुड़े कई फायदे होंगे।

 

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सेहत

शरीर के लिए अमृत है कच्चे आम का पना, लू और डिहाइड्रेशन से बचाए…

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चिलचिलाती गर्मी का कहर शुरू हो गया है. लू भी चलने लगी है. ऐसे में आपके शरीर के लिए कच्चे आम का पना अमृत साबित हो सकता है. कच्ची कैरी से बना पना लू से बचाने में मदद करता है. गर्मियों में शरीर को हिडाइड्रेट होने के साथ लू से बचाने भी होता है. इन दिनों में कई लोगों का हजामा भी खराब हो जाता है और अपच, गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बनी रहती हैं. ऐसे में कच्चे आम (कैरी) से बना पन्ना आपके शरीर को स्वस्थ रख सकता है. गर्मी के मौसम में सबसे स्वादिष्ट और पौष्टिक ड्रिंक होता है कच्चे आम का पन्ना. कच्चे आम के पन्ना को आप ड्रिंक की तरह ऐसे ही पी सकते हैं या फिर खाने के साथ भी इसे ले सकते हैं. कभी सब्जी खाने का मन न हो तो आप आम के पन्ना के साथ रोटी भी खा सकते हैं. बस इसे थोड़ा गाढ़ा बनाकर तैयार करें. आम पन्ना पेट और पाचन के लिए भी फायदेमंद होता है. आप इसे बिना किसी झंझट के आसानी से तैयार कर सकते हैं और हफ्तेभर के लिए स्टोर करके भी रख सकते हैं.

कच्चे आम का पन्ना बनाने की विधि
स्वाद और पोषण से भरपूर कच्चे आम का पन्ना बनाने के लिए सबसे पहले कच्चा आम लेकर उसे धोएं. इसके बाद कच्चे आम (कैरी) को प्रेशर कुकर में डालें और जरुरत के मुताबिक पानी डालकर उन्हें उबालने के लिए रख दें. 4-5 सीटियां आने के बाद गैस बंद कर दें और प्रेशर कुकर को ठंडा होने दें. कुकर का प्रेशर रिलीज होने के बाद ढक्कन खोलें और कच्चे आम को पानी से निकाल लें. कच्चे आम जब ठंडे हो जाएं तो उनका छिलका उतार लें और एक बर्तन में आम का गूदा निकाल लें. इसके बाद कैरी की गुठली को भी अच्छी तरह से मसलें जिससे गूदा पूरी तरह से निकल सके. अब बर्तन के गूदे को अच्छी तरह से मसलें और उसमें कटी हुई पुदीना पत्तियां, काला नमक, जीरा पाउडर समेत अन्य सभी सामग्रियों को डालकर मिक्स कर दें. अब इस मिश्रण को मिक्सर में डालें और जरूरत के हिसाब से पानी डालकर ब्लेंड करें.मिश्रण को एक दो मिनट तक ब्लेंड करने के बाद एक बर्तन में निकाल लें. अगर पना गाढ़ा लगे तो उसमें थोड़ा और पानी मिला सकते हैं. इसके बाद पन्ने में कुछ आइस क्यूब्स डालें और कुछ देर के लिए छोड़ दें. जब आम का पना ठंडा हो जाए तो उसे सर्विंग गिलास में डालें और उसमें एक-दो आइस क्यूब्स मिलाकर ठंडा-ठंडा सर्व करें.

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भारतीय महिलाओं में क्यों बढ़ रही पीसीओडी बीमारी की समस्या…

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देश में कई बीमारियों का दायरा बढ़ रहा है. कैंसर, हार्ट डिजीज और पेट की बीमारियों के मरीजों के ग्राफ में हर नए साल के साथ इजाफा हो रहा है. इन बीमारियों के बीच एक ऐसी बीमारी भी है जो भारत में बहुत तेजी से अपने पांव पसार रही है, लेकिन इसकी तरफ ध्यान कम दिया जा रहा है. यहां हम महिलाओं मे होने वाली PCOD यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज की बात कर रहे हैं. देश में बीते एक दशक में इस बीमारी से जूझ रही महिलाओं की संख्या बढ़ रही है. 16 साल से लेकर 40 साल की उम्र तक की महिलाएं भी इसका शिकार हो रही हैं. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक (20%) महिला पीसीओएस से पीड़ित है. ये बीमारी बांझपन का एक बड़ा कारण बन रही है. द लैंसट की 2021 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीओडी का इलाज न होने से 15 से 20 फीसदी महिलाएं एंडोमेट्रियल कैंसर का शिकार हो सकती हैं. इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये बीमारी कितनी खतरनाक है, हालांकि भारत में अधिकतर महिलाएं इस डिजीज को लेकर जागरूक नहीं हैं. इस कारण ये बीमारी कई मामलों में गंभीर रूप ले लेती है और महिलाएं बांझपन का शिकार हो जाती है. यहां ये जानना बहुत जरूरी है कि भारत में पीसीओडी की बीमारी क्यों इतनी तेजी से बढ़ रही है? महिलाएं इससे कैसे बच सकती हैं और इसका इलाज किस तरह हो सकता है.

क्यों तेजी से बढ़ रही पीसीओडी की बीमारी

इस बारे में सफदरजंग हॉस्पिटल में ऑन्को गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सलोनी चड्ढा ने जानकारी दी है. डॉ सलोनी बताती हैं कि पीसीओडी डिजीज होने का कोई एक खास कारण नहीं है. बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल, मेंटल स्ट्रेस, खानपान की गलत आदतें, धूम्रपान और शराब का सेवन इस डिजीज के होने के बड़े रिस्क फैक्टर हैं. बीते कुछ सालों से महिलाओं का लाइफस्टाइल खराब हो रहा है. सोने और जागने का समय निर्धारित नहीं है. लगातार बिगड़ रहा लाइफस्टाइल पीसीओडी होने का कारण बन रहा है. कुछ मामलों में ये बीमारी जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है. यानी एक से दूसरी पीढ़ी में जा सकती है, डॉ सलोनी बताती हैं कि पीसीओडी की बीमारी 16 से 18 साल की उम्र से लेकर 30 साल की उम्र के बाद भी हो सकती है. इसकी वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है. पुरुष हार्मोन बढ़ जाते हैं. इससे कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं. चेहरे पर बाल आने लगते हैं. शरीर के कई अन्य अंगों पर ज्यादा बाल उगने लगते हैं. पीरियड्स आने का पैटर्न भी खराब हो जाता है. समय पर पीरियड्स नहीं आते हैं.

क्या-क्या और दूसरी परेशानियां होती हैं

पीसीओडी की वजह से ओवरी में छोटे- छोटे सिस्ट यानी की गांठ बनने लगती हैं. इन सिस्ट की वजह से गर्भधारण करना मुश्किल होता है. यही कारण है कि पीसीओडी बांझपन का भी कारण बन जाती है. इस डिजीज के कारण महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी होता है. इस वजह से उनकी सेल्स इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाती है. जब सेल्स इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन की मांग बढ़ जाती है. इसकी पूर्ति के लिए पैनक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाता है. अतिरिक्त इंसुलिन बनने की वजह से मोटापे से संबंधित समस्या होने लगती है. मोटापा बढ़ने से स्लीप एप्निया की समस्या होने का रिस्क रहता है. इस स्थिति के कारण रात के दौरान सांस लेने में बार-बार रुकावट आती है, जिससे नींद में बाधा आती है. स्लीप एपनिया उन महिलाओं में अधिक आम है जो अधिक वजन वाली हैं, खासकर अगर उन्हें पीसीओएस भी है. जिन महिलाओं में मोटापा और पीसीओडी दोनों हैं, उनमें स्लीप एपनिया का जोखिम उन महिलाओं की तुलना में 5 से 10 गुना अधिक है, जिनको पीसीओडी नहीं है. इस बीमारी की वजह से हुआ हार्मोनल इंबैलेंस और अनचाहे बालों के बढ़ने जैसे लक्षण महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असर डालते हैं. इससे महिलाएं एंग्जाइटी और डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं.

पीसीओडी का इलाज क्या है

नई दिल्ली के एम्स में प्रोफेसर डॉ रीमा दादा बताती हैं कि दवाओं और सर्जरी के माध्यम से इस बीमारी को ट्रीट किया जाता है. इसके अलावा डॉक्टर आपको लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने की सलाह देते हैं. साथ ही खानपान का रूटीन भी तय करते हैं. इसके लिए डाइट में हरे फल और सब्जियों को शामिल करने के लिए कहा जाता है. खानपान में फाइबर की मात्रा को बढ़ाने की सलाह दी जाती है. वजन को मेंटेन रखने के लिए एक्सरसाइज करने के लिए कहा जाता है. इसके साथ ही रोग योग करने की सलाह भी दी जाती है. योग के जरिए पोसीओडी की बीमारी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. योग करने से काफी फायदा मिलता है. एम्स मे पीसओडी से पीड़ित कई महिलाओं को योग के जरिए इस बीमारी से बचाने का काम किया गया है. योग करने से मोटापा भी कंट्रोल में रहता है और मानसिक तनाव भी कम होता है. कपालभाति और सूर्य नमस्कार जैसे प्राणायाम इसमें काफी फायदेमंद साबित होते हैं.

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