Connect with us

देश-विदेश

पराली से ज्यादा किस चीज से फैल रहा प्रदूषण….

Published

on

SHARE THIS

28 नवंबर 2023:- दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है. लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं. इसी बीच  की एक रिसर्च रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट  ने दिल्ली-एनसीआर के 11 थर्मल पॉवर प्लांट्स से निकलने वाले तत्वों,नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड पर एक रिसर्च किया है. ये रिसर्च ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority) के अप्रैल 2022 से अगस्त 2023 के बीच के आंकड़ों पर आधारित है.दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. एक रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली-एनसीआर के पॉवर प्लांट्स यहां की आबोहवा में जहरीले तत्व घोल रहे हैं. इस रिसर्च के मुताबिक दिल्ली NCR में पीएम 2.5 प्रदूषण में थर्मल पॉवर प्लांट्स का हिस्सा करीब आठ फीसदी है. सवाल उठता है कि आखिर इस तरह के प्लांट्स मानदंडों को पूरा करने में असमर्थ क्यों हैं?

क्यों बढ़ाई गई समयसीमा..

CSE के औद्योगिक प्रदूषण के कार्यक्रम निदेशक निवित यादव ने कहा है कि इसकी खास वजह समय सीमा को लगातार आगे बढ़ाया जाना है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से संशोधन के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में पावर प्लांट्स नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे तत्वों को लेकर मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. इसके चलते ये प्लांट्स दिल्ली एनसीआर की आबोहवा में जहर घोल रहे हैं. फिलहाल पराली के मुकाबले ये प्लांट्स करीब 6 फीसदी ज्यादा प्रदूषण फैला रहे हैं.

सरकारों के दावे हुए फेल..

दिसंबर 2015 में ऊर्जा मंत्रालय ने कोयला आधारित संयंत्रों के लिए कुछ मानक तैयार किये थे, दो साल के भीतर जिनका कड़ाई से पालन किया जाना था. लेकिन बाद में मंत्रालय ने दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर सभी ऊर्जा संयंत्रों के लिए 5 साल तक की समय सीमा को बढ़ा दिया. क्षेत्र में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए इसे 2019 तक अमल में लाया जाना था. केंद्र और दिल्ली सरकार एक ओर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को कम करने के लिए कई कदम उठाने का दावा करती है लेकिन दूसरी ओर थर्मल पावर प्लांट्स से निकलते धुओं को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है. लेकिन हालात ये है कि इस दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि दिल्ली में लोग स्वच्छ हवा में सांस ले सकें.

 

SHARE THIS

देश-विदेश

क्या कांग्रेस के लिए टल गया हिमाचल प्रदेश का संकट, एक साथ आए सीएम सुखविंदर सुक्खू और प्रतिभा सिंह

Published

on

SHARE THIS

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सरकार पर आया सियासी संकट अब टलता हुआ दिख रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह एक साथ आते हुए दिख रहे हैं। गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में दोनों नेता एक एक साथ दिखे। इस कांफ्रेंस में बोलते हुए प्रतिभा सिंह ने कहा कि हमें दुःख है कि हम राज्यसभा की सीट नहीं जीत पाए।

पार्टी मजबूत थी और है- प्रतिभा सिंह

उन्होंने कहा कि हमें इस बात का दुःख है कि हम हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट नहीं जीत सके। अब हम इस बात से आगे बढ़ रहे हैं और अगली चुनौती जीकी लोकसभा चुनाव हैं, उसके लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश में पहले भी मजबूत थी और अब भी मजबूत है। उन्होंने कहा कि हमने जो भी मुद्दे उठाए थे, उन्हें आलाकमान को बता दिया गया है और जल्द ही समाधान भी निकल आएगा।

अब कोई विवाद नहीं है- भूपिंदर सिंह हुड्डा 

वहीं राज्य में पर्यवेक्षक बनकर आए भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि हमने राज्यसभा सीट किन वजहों से खोई, इसका सभी को पता है। लेकिन हमने इस विषय पर बात की है और सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है। अब कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री सुक्खू ही बने रहेंगे। एक 6 सदस्यीय कॉर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी। इसके सदस्यों के नामों का ऐलान आलाकमान करेगा। यह कमिटी सरकार को सलाह देगी। वहीं 6 विधायकों को बर्खास्त करने पर उन्होंने कहा कि यह स्पीकर का फैसला है।

हमने सभी मतभेदों को सुलझा लिया है- डीके शिवकुमार 

वहीं डीके शिवकुमार ने कहा कि सीएम सुक्खू ने माना है कि कुछ गलतियां हुई हैं और उन्हें आगे नहीं दोहराया जाएगा। हमने सभी विधायकों से बात की है और सभी की समस्याओं को सुना है। सभी मतभेदों को सुलझा लिया गया है। हम सब मिलकर काम करेंगे। उन्होंने आरोप लगते हुए कहा कि बीजेपी सरकार गिराने की साजिश रच रही थी, जिसे हमने विफल कर दिया है। सरकार पर कोई संकट नहीं है।

SHARE THIS
Continue Reading

खेल

टीम इंडिया के पास करिश्मे का मौका, जो आज तक नहीं हुआ, क्या अब होगा

Published

on

SHARE THIS

भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले टेस्ट सीरीज के आखिरी मुकाबले की तैयारी में जुटने जा रही है। बीसीसीआई की ओर से आज ही इसके लिए स्क्वाड का भी ऐलान कर दिया गया है। हालांकि इसमें ज्यादा फेरबदल नहीं हुए हैं, जिनकी संभावना पहले से ही थी, काफी कुछ वैसा ही हुआ है। इस बीच 7 मार्च को जब भारतीय टीम धर्मशाला में इंग्लैंड के खिलाफ उतरेगी तो उसके पास एक करिश्मा करने का मौका होगा। जो आज तक भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कभी नहीं हुआ, वो अब हो सकता है। इसके लिए ​केवल एक जीत की दरकार है।

भारतीय टीम ने हारे ज्यादा और जीते टेस्ट कम 

भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने अब तक के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में जितने मैच जीते हैं, उससे ज्यादा में उसे हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन अब ये तस्वीर बदल भी सकती है। अगर भारतीय टीम धर्मशाला में इंग्लैंड को हराने में कामयाब हो जाती है तो उसके पास मौका होगा कि पहली बार जीते और हारे हुए मैचों की संख्या बराबर हो जाएगी। यहां हम टेस्ट क्रिकेट की बात कर रहे हैं, ये ध्यान रखिएगा। अब तक दुनिया की केवल 4 ही टीमें ऐसा करने में कामयाब हो पाईं हैं और भारतीय टीम पांचवीं हो सकती है।

इन टीमों ने जीते ज्यादा और हारे मैच कम 

चलिए पहले बात उन टीमों की करते हैं, जिन्होंने मैच जीते ज्यादा हैं और हारे कम हैं। इंग्लैंड की टीम ने अब तक टेस्ट में 392 मैच जीते हैं और 323 में उसे हार का सामना करना पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो उसने अब तक 412 टेस्ट मैच जीते हैं और 232 में ही उसे पराजय मिली है। इसके बाद नंबर आता है साउथ अफ्रीका का, उसने अब तक 178 मुकाबले जीते हैं और 161 हारे हैं। यहां तक कि पाकिस्तान का भी नाम इस लिस्ट में आता है। पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने 148 मैच जीते हैं और 142 में उसे हार का सामना करना पड़ा है। ये लिस्ट यहीं पर खत्म हो जाती है।

भारत के जीते और हारे मैचों की संख्या हो सकती है बराबर 

अब बात भारतीय क्रिकेट टीम की। भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 1932 में खेला था। तब से लेकर अब तक भारतीय टीम 578 मुकाबले खेल चुकी है। इसमें से उसे 177 में जीत मिली है और 178 में हार झेलनी पड़ी है। इन 92 साल में कभी ऐसा नहीं हुआ कि भारतीय टीम के जीते हुए मैचों की संख्या ज्यादा हो और हारे हुए की कम। हो तो अभी भी ये नहीं पाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि हारे और जीते हुए मैचों की संख्या बराबरी पर जरूर पहुंच सकती है। यानी भारत ने 177 मैच जीते हैं और अगला मैच जीतते ही इसकी संख्या 178 हो जाएगी, इतनी ही हारे हुए मैचों की संख्या भी है।

आखिरी मैच में भी ढील की उम्मीद नहीं 

अब देखना ये दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय टीम धर्मशाला टेस्ट जीतकर ऐसा करने में कायमाब हो पाती है। सीरीज भले ही जीत ली गई हो, लेकिन इसके बाद भी कोशिश यही होनी चाहिए कि आखिरी मैच में भी अंग्रेजों को धूल चटाई जाए। इससे नया कीर्तिमान तो बनेगा ही, जो हमने आपको अभी बताया, इसके साथ ही विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के प्वाइंट्स टेबल में भी भारतीय टीम को फायदा मिल सकता है, जो आने वाले वक्त में काफी काम आएगा। बीसीसीआई की ओर से आखिरी मैच के ​लिए जिस टीम का ऐलान किया गया है, उससे तो नहीं लगता कि भारतीय टीम किसी भी तरह की ढील देगी, लेकिन मैच के दौरान खिलाड़ी कैसा खेलते हैं, इस पर ही सारा कुछ निर्भर करेगा।

SHARE THIS
Continue Reading

देश-विदेश

तो भरण-पोषण राशि की हकदार नहीं होगी पत्नी, मेंटेनेंस को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Published

on

SHARE THIS

रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने पत्नी के अलग रहने की दशा में पति द्वारा दी जाने वाली भरण-पोषण राशि या मेंटेनेंस को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि यदि कोई पत्नी बिना किसी वैध कारण के पति से अलग रहती है, तो वह भरण-पोषण की राशि की हकदार नहीं है। जस्टिस सुभाष चंद की कोर्ट ने रांची की फैमिली कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अमित कुमार कच्छप नाम के शख्स को आदेश दिया गया था कि वह अपनी पत्नी संगीता टोप्पो के भरण-पोषण के लिए हर महीने 15 हजार रुपये की रकम दे।

महिला का आरोप, ससुराल में हुई थी दहेज की मांग

हाई कोर्ट ने कहा, ‘दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए सबूतों को देखने पर यह पाया गया कि प्रतिवादी बिना किसी उचित कारण के अपने पति से अलग रह रही है। इसके परिणामस्वरूप, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125 (4) के मद्देनजर वह किसी भी राशि के भरण-पोषण की हकदार नहीं है।’ बता दें कि संगीता टोप्पो ने रांची की फैमिली कोर्ट में अपने पति अमित कुमार कच्छप के खिलाफ दायर केस में आरोप लगाया था कि 2014 में आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार शादी के बाद जब वह ससुराल गई तो उससे कार, फ्रिज और LED टीवी सहित दहेज की मांग शुरू हो गई।

कोर्ट ने निर्धारित किया था 15 हजार रुपये का भत्ता

संगीता टोप्पो ने अपने आरोप में कहा कि पति और उसका परिवार दहेज के लिए उस पर दबाव डालता था। उसने कहा कि पति छोटी-छोटी बातों पर उसकी उपेक्षा करता था, और अक्सर शराब के नशे में उसके साथ दुर्व्यवहार करता था। संगीता ने अपने पति पर एक महिला के साथ विवाहेतर संबंध रखने का आरोप भी लगाया और भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह 50 हजार रुपये का दावा ठोंका था। इस पर फैमिली कोर्ट ने उसके पक्ष में आदेश पारित करते हुए 30 अक्टूबर 2017 से हर माह 15 हजार रुपये का भरण-पोषण भत्ता निर्धारित किया था और पति को इस राशि का भुगतान करने को कहा था।

‘शादी के बाद सिर्फ एक हफ्ते तक साथ रही पत्नी’

फैमिली कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पति अमित कुमार कच्छप ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन दायर किया था। उसका कहना था कि शादी के बाद उसकी पत्नी एक सप्ताह के लिए जमशेदपुर में उसके घर रही। इसके बाद वह अपने परिजनों की कुछ दिनों तक सेवा करने के नाम पर रांची चली गई। उसने कहा था कि 15 दिनों के भीतर वापस आ जाएगी, लेकिन बार-बार अनुरोध करने के बाद भी वह नहीं लौटी।

SHARE THIS
Continue Reading

खबरे अब तक

WEBSITE PROPRIETOR AND EDITOR DETAILS

Editor/ Director :- Rashid Jafri
Web News Portal: Amanpath News
Website : www.amanpath.in

Company : Amanpath News
Publication Place: Dainik amanpath m.g.k.k rod jaystbh chowk Raipur Chhattisgarh 492001
Email:- amanpathasar@gmail.com
Mob: +91 7587475741

Trending