रायपुर: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व आईएस अधिकारी विवेक ढांड का नाम भी सामने आया है। पूर्व मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट में पेश किए गए आवेदन में विवेक ढांड को पूरे घोटाले का मास्टर माइंड बचाया गया है। कहा गया है कि ढांड के निर्देशन में अववर ढेबर, अनिल टुटेजा और अरुणपति त्रिपाठी काम कर रहे थे। यह भी दावा किया गया है कि घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी विवेक ढांड को हिस्सेदारी भी दी गई है।
कंपनियों से कराते थे शराब का अवैध उत्पादन
दावा किया गया है कि शराब घोटाले में शामिल लोग शराब कंपनियों से शराब का अवैध उत्पादन करवाते थे। इस अवैध शराब की सप्लाई शराब घोटाले के सिंडेकेट चलाते थे। जिसके बदले में उन्हें कमीशन मिलता था। ईडी के अनुसार, 2019 से 2022 तक लाइसेंसी शराब की दुकानों पर नकली होलोग्राम लगाकर बड़ी मात्रा में अवैध शराब बेची जाती थी। जिससे राजस्व विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
कवासी लखमा के घर में हुई थी रेड
शराब घोटाले को लेकर ईडी की टीम ने 28 दिसंबर को पूर्व मंत्री कवासी लखमा के यहां रेड की थी। ईडी ने दावा किया था कि कवासी लखमा के घर से उसे घोटाले में शामिल होने के कई सबूत मिले हैं। ईडी की पूछताछ में आबकारी विभाग के अधिकारी इकबाल खान और जयंत देवांगन ने इस बात की पुष्टि की थी कि वह लोग पैसों की व्यवस्था करके पूर्व मंत्री को भेजते थे। वहीं, भेजी गई सरकार को सुकमा में कन्हौयालाल कुर्रे कलेक्ट करता था।
कौन हैं विवेक ढांड
विवेक ढांड 1981 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं। ढांड 1 मार्च 2014 को राज्य के मुख्य सचिव बने थे। उनके नाम सबसे लंबे समय तक मुख्य सचिव बने रहने का रेकॉर्ड है। वह 3 साल 7 महीने से ज्यादा समय तक राज्य के मुख्य सचिव रहे। विवेक ढांड भूपेश बघेल की सरकार में नवाचार आयोग के अध्यक्ष पद पर काम कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
घोटाले में जेल में कई बड़े नाम
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ईडी लंबे समय से छत्तीसगढ़ में कर रही है। इस घोटाले का खुलासा कांग्रेस की सरकार में हुआ था। ईडी ने इस मामले में कई सीनियर अधिकारियों और कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। शराब घोटाले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा समेत कई अधिकारी और कारोबारी जेल में हैं।