
रायगढ़ : उद्योग विभाग में सब्सिडी को लेकर जो खेल हो रहा है, उससे सरकार को हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पुराने निर्माण और ज्यादा लागत दिखाकर पूंजी अनुदान और ब्याज लिया जा रहा है। ऐसे कई मामले हैं। एक मामला ऐसा है जिसमें जिला स्तरीय समिति ने निरीक्षण के बाद इकाई का निर्माण पुराना पाया। इसे निरस्त भी कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब राज्य स्तरीय समिति ने इसे पलट कर सब्सिडी देने का आदेश कर दिया।
छोटे और मध्यम उद्योगों को पिछड़े क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए सरकार अनुदान दे रही है। इसका सबसे ज्यादा फायदा वेयरहाउस, राइस मिल, ब्रिक्स प्लांट, क्रशरों ने उठाया। पुराने निर्माण को नया बताकर बैंक वैल्युअर से ज्यादा लागत लिखवाकर, सीए सर्टिफिकेट में मनमाना निवेश बताते हुए 40 प्रश तक सब्सिडी हासिल कर ली।
उद्योग विभाग रायगढ़ ने रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 77 करोड़ की सब्सिडी मंजूर की। कई फर्मों ने धोखाधड़ी करते हुए पुरानी फर्म को नया साबित कर दिया। उद्योग संचालनालय तक भ्रष्टाचार का तार जुड़े हुए हैं। ऐसा एक मामला सारंगढ़ का है। यहां पुरुषोत्तम राइस मिल बैगीनडीह को 66 लाख की सब्सिडी दी गई। राइस मिल संचालक पुष्पा अग्रवाल ने इकाई का नवनिर्माण बताकर 1.66 लाख का निवेश दिखाया। महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र में आवेदन प्रस्तुत किया। इस बीच युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा ने इसकी शिकायत कर दी। उद्योग विभाग ने जांच की तो पाया कि इकाई का निर्माण 2014 में ही हो चुका है। बिल्डिंग कम से कम पांच साल पुरानी है। बैंक ऑफ बड़ौदा के वैल्युअर अरविंद साहू की रिपोर्ट 14 नवंबर 2019 को जारी की गई थी जिसमें भी निर्माण पांच वर्ष पहले का बताया गया है।
उद्योग विभाग ने बैंक को पत्र लिखकर वैल्युअर रिपोर्ट की सत्यापित प्रति मंगवाई। इस रिपोर्ट में भी निर्माण पुराना बताया गया। नवीन शेड भवन निर्माण के नाम पर सब्सिडी लेने के लिए झूठा दावा किया गया था। छग राज्य स्थायी पूंजी निवेश अनुदान नियम के तहत जिला स्तरीय समिति ने 17 मई 2022 को सब्सिडी आवेदन निरस्त कर दिया।
संचालनालय में पलटा मामला
निरस्तीकरण के विरुद्ध राइस मिल संचालक ने राज्य स्तरीय समिति के समक्ष अपील की। इस बार पूरा समीकरण बदल गया। उद्योग विभाग को दोबारा निरीक्षण कर पुरुषोत्तम राइस मिल के पक्ष में रिपोर्ट बनाने को कहा गया। दिलचस्प बात यह है कि प्रबंधक केएन मेहर ने ही रिपोर्ट में इकाई को पुराना होने की पुष्टि की थी। अब उन्हीं ने फिर से इकाई को नया होने की रिपोर्ट दी। ठीक एक साल बाद 29 मई 2023 को हुई बैठक में राज्य स्तरीय समिति ने शेड निर्माण को नया माना। इसके आधार पर जिला स्तरीय समिति को अनुदान स्वीकृत करने को कहा। राज्य स्तरीय समिति में अध्यक्ष अनिल टुटेजा तत्कालीन संचालक उद्योग, सदस्य सचिव प्रवीण शुक्ला अपर संचालक उद्योग, सदस्य अनिल श्रीवास्तव, एचएल हिडको और आशीष गुप्ता थे।
टुटेजा और शुक्ला दोनों पर ईडी का शिकंजा
अनिल टुटेजा और प्रवीण शुक्ला ने जितने भी सब्सिडी के केस पास किए हैं, उनमें ज्यादातर विवादित रहे हैं। सब्सिडी घोटाले तक भी ईडी पहुंच चुकी है। पुरुषोत्तम राइस मिल के प्रकरण में जिला स्तर पर निरीक्षण, बैंक वैल्युअर की रिपोर्ट से इकाई पुरानी होने की पुष्टि की गई थी। फिर ऐसा क्या जादू हुआ कि एक ही साल में इकाई को नया मान लिया गया। ईडी ने उद्योग संचालनालय समेत अनिल टुटेजा और प्रवीण शुक्ला के ठिकानों में छापेमारी की थी।