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क्या ज़्यादा पानी पीने से कंट्रोल होता है बैड कोलेस्ट्रॉल…जानें क्या कहते हैं डॉक्टर?

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बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से लोग दिल की बीमारियों की चपेट में बहुत जल्दी आते हैं।  आपके दिल का रास्ता कोलेस्ट्रल से जुड़ा हुआ है। हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रल पाए जाते हैं।गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल। बैड कोलेस्ट्रल बढ़ने से लोग दिल संबंधी बीमारियों के शिकार होने लगते हैं। ऐसी में अगर आपका भी बैड कोलेस्ट्रल बढ़ा हुआ है तो उसे कंट्रोल करने के लिए आपको अपनी लाइफ स्टाइल और डाइट सही करनी होगी। साथ ही पानी पीकर भी आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं। आकाश हेल्थकेयर के कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन, डॉ.नवनीत गिल, बता रहे हैं कि ज़्यादा पानी पीने से आपका दिल स्वस्थ कैसे रह सकता है?

कम पानी पीने से बढ़ सकता है बैड कोलेस्ट्रॉल 

‘जल ही जीवन’ यूँ ही नहीं कहा गया है। हमारे शरीर का 70 प्रतिशत पानी से बना हुआ है इसलिए हेल्दी रहने के लिए सही मात्रा में पानी पीना बेहद ज़रूरी है। कम पानी पीना कोलेस्ट्रॉल लेवल को प्रभावित करता है। जब आप पानी कम पीते है तो नसों में जमी गंदगी चिपकी ही रहती है जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ता है और दिल से जुड़ी बीमारियों की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

ज़्यादा पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल होगा कंट्रोल 

पानी एक तरह का डिटॉक्सिफाइंग एजेंट है जो शरीर को डिटॉक्स करता है।जिसमें एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कंट्रोल में रहती है।डिहाइड्रेशन की वजह से लिवर खून में अधिक कोलेस्ट्रॉल बनने के लिए प्रेरित होता है।इस वजह से शरीर  बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में असमर्थ हो जाता है। इसलिए बेहतरीन डाइट के साथ नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से हाई कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मदद मिलती है।पानी के आलावा मरीजों को अपनी डाइट में फाइबर, प्रोटीन युक्त फूड्स को शामिल करना चाहिए।

दिल को कैसे हेल्दी रखता है पानी? 

ज़्याद पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।आपकी बॉडी डिटॉक्स होती है और ये ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को भी तेज करता है। दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी पीने से हाई बीपी और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से आपका बचाव होता है और दिल की सेहत दुरुस्त रहती है। आप दिल के मरीज हों चाहे न हों दिनभर में कम से कम  1.5 से 2 लीटर तक पानी तो पीना ही चाहिए।

 

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पुरुषों में मोटापा है खतरनाक! बढ़ते पेट से हो सकती हैं 5 बीमरियां..

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मोटापा” आज के समय में एक आम समस्या हो चुकी है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों की गिनती भी ज्यादा है जो मोटापे से ग्रस्त हैं। बाहर निकलते पेट के साथ पुरुषों का मोटापा बहुत खतरनाक है। पेट के बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में कई गंभीर रोग अपनी जगह बनानी शुरू कर देते हैं। आंकड़ों की मानें तो ज्यादा वजन या मोटापे से होने वाली बीमारियों से हर साल करीब 2.8 मिलियन लोग मर जाते हैं। भारतीय पुरुषों की संख्या 26 मिलियन है जो मोटापे और उससे होने वाली समस्या से परेशान है। आइए उन 5 बीमारियों के बारे में बताते हैं जो पुरुषों में मोटापे के कारण हो सकती हैं।

मधुमेह (Diabetes)

मोटापे से पीड़ित कई लोग मधुमेह यानी डायबिटीज की बीमारी से परेशान हैं। भारत में पेट के मोटापे के कारण 27 प्रतिशत पुरुषों में डायबिटीज का खतरा रहता है और शरीर में शुगर बढ़ने लगता है। वजन को कम करने के साथ शुगर को भी कंट्रोल में किया जा सकता है।

दिल की बीमारी (Heart Diseases)

आजकल दिल की बीमारी के खतरे बढ़ते ही जा रहे हैं। हार्ट अटैक, कार्डिस्ट अटैक जैसी अन्य दिल की बीमारियां पुरुषों में बढ़ते पेट के वजह से हो सकती है। 40 से अधिक बीएमआई वाले पुरुषों में दिल की बीमारी होना आम बात है। हालांकि, ये खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए वजन को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है।

प्रोस्टेट का बढ़ना (Benign Prostatic Hyperplasia)

पुरुषों में होने वाली सबसे आम समस्याओं में से एक प्रोस्टेट का बढ़ना है, जिसे सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया और बीपीएच के नाम से भी जाना जाता है। प्रोस्टेट के बढ़ने की शिकायत 40 से अधिक उम्र के पुरुषों में हो सकती है। ये स्थिति 50 प्रतिशत पुरुषों में 51 से 60 साल की उम्र और 90% पुरुषों में 80 साल से अधिक उम्र में देखी जा सकती है। मोटापे से पुरुषों में सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया के होने का खतरा ज्यादा रहता है।

उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)

पुरुषों के मोटापे से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ा रहता है। पेट के बढ़ने के साथ पुरुषों के दिल पर दबाव पड़ता है और उच्च रक्तचाप खतरनाक साबित हो सकता है।

हड्डियों की बीमारी (Osteoarthritis)

मोटापे के साथ बढ़ता पेट, पुरुषों में हड्डियों के रोग को बुलावा देता है। कई लोग हाथ-पैरों की हड्डियों के दर्द से परेशान रहते हैं, तो कुछ पुरुषों के घुटनों में दर्द, कमर में दर्द, कूल्हे में दर्द जैसी समस्या रहती है। ऑस्टिओआर्थरिटिस होने का खतरा भी रहता है।

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खून की कमी दूर कर देगा लाल सब्जी का जूस,आज ही करें सेवन….

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जाना चुकंदर का जूस पीना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि यह शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है और कई स्वास्थ्य लाभ देता है. खासतौर से यह एथलीट्स, फिटनेस फ्रीक और वर्कआउट के शौकीन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. यह जूस एनर्जी बढ़ाने और मसल्स की परफॉर्मेंस में सुधार कर सकता है. मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह जूस बेहद फायदेमंद हो सकता है. जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है या जिन लोगों के शरीर में खून की कमी है, उन्हें रोजाना एक गिलास चुकंदर का जूस जरूर पीना चाहिए.चुकंदर पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है, जिसमें कई पावरफुल कंपाउंड पाए जाते हैं. चुकंदर में भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन C और फोलिक एसिड होता है, जो इम्यून सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है. चुकंदर में आयरन, मैंगनीज और पोटेशियम जैसे मिनरल्स भी होते हैं, जो ब्लड फ्लो को सुधार सकते हैं. चुकंदर खाने से शरीर में रेड ब्लड सेल्स की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है. आयरन से भरपूर होने के कारण यह खून बढ़ाने में भी मददगार होता है. चुकंदर में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो ओवरऑल हेल्थ को बढ़ावा देने में मदद करते हैं.

चुकंदर का जूस पीने के फायदे जान लें

1. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में चुकंदर का जूस बेहद कारगर माना जा सकता है. इस जूस में नाइट्रेट्स होते हैं, जो ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करते हैं, जिससे ब्लड फ्लो में सुधार हो जाता है. इससे हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को राहत मिलती है चुकंदर में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्यूनिटी को मजबूती मिलती है. नियमित रूप से यह जूस पीने से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.

2. चुकंदर का जूस पीने से शरीर के एनर्जी लेवल में सुधार हो सकता है. नाइट्रेट्स से भरपूर होने के कारण यह लाल जूस मांसपेशियों की ऑक्सीजन उपयोग करने की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे एक्सरसाइज के दौरान थकान कम होती है. चुकंदर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है. इसका जूस पीने से कब्ज की समस्या से राहत मिलती है और आंतों के स्वास्थ्य में सुधार होता है.

3. चुकंदर का जूस कम कैलोरी और हाई फाइबर से भरपूर होता है, जिससे यह वजन कम करने में सहायक है. यह लंबे समय तक लोगों को पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे कैलोरी इनटेक कम करने में मदद मिलती है. चुकंदर का जूस त्वचा की सेहत के लिए लाभकारी है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C त्वचा को निखारते हैं और मुंहासों को कम करने में मदद करते हैं.

4. चुकंदर का जूस हमारे लिवर के लिए बेहद फायदेमंद होता है. यह लिवर हेल्थ में सुधार करता है और लिवर में जमे टॉक्सिक एलीमेंट्स को बाहर निकालने में मदद करता है. चुकंदर का जूस लिवर डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है. चुकंदर का जूस ब्रेन के लिए फायदेमंद होता है. इसमें नाइट्रेट्स होते हैं, जो ब्रेन के ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं, जिससे ब्रेन फंक्शनिंग बेहतर होती है. साथ ही ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार होता है.

5.  चुकंदर का जूस दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है. यह ब्लड प्रेशर को कम करने और कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल रखने में मदद करता है. इससे हार्ट डिजीज का जोखिम कम हो जाता है. चुकंदर में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं. चुकंदर का जूस पीने से अर्थराइटिस और अन्य सूजन संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है.

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गर्भनिरोधक गोलियों महिलाओं के लिये बढ़ा रहा है खतरा…

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गर्भनिरोधक गोलियां एक आपातकालीन गर्भनिरोधक तरीका है जिससे अनचाही प्रेगनेंसी को रोका जा सकता है. असुरक्षित यौन संबंध के 72 घंटों के अंदर इसके इस्तेमाल से प्रेगनेंसी नहीं होती. इसलिए इसे सबसे सुविधाजनक तरीका मानकर महिलाएं इसका सेवन करती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2022 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, ओवर द काउंटर मिलने वाली गर्भनिरोधक गोलियों का यूज 18 से 30 साल की महिलाओं में बीते 5 सालों में 25 फीसदी तक बढ़ा है जो बेहद चौंकाने वाला है. साथ ही ये महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक ऐसी चिंता को बढ़ा रहा है जिससे आगे चलकर उन्हें कई परेशानियां झेलनी पड़ सकती है. गर्भनिरोधक गोलियां दरअसल हार्मोन को प्रभावित करती है जिससे प्रेगनेंसी नहीं ठहरती. लेकिन इसके बार-बार इस्तेमाल से हार्मोन काफी ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं. इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सेवन ज्यादा नहीं करना चाहिए.

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कब करें

सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर नुपुर गुप्ता बताती हैं कि आप किसी आपातकालीन स्थिति में इसका उपयोग एक या दो बार कर सकते हैं लेकिन बार-बार इस दवा को लेने के अपने कई साइड इफेक्ट्स हैं, ये आपके हार्मोन पर असर डालकर आपके पीरियड्स अनियमित कर देती है जिससे आगे चलकर आपको कई कॉम्प्लिकेशंस का सामना करना पड़ सकता है. कई बार देखा गया है कि इसके ज्यादा इस्तेमाल से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर, एक्टोपिक प्रेगनेंसी (फैलोपियन ट्यूब में प्रेगनेंसी), हाई रिस्क प्रेगनेंसी या बाद में कंसीव करने में परेशानी आना जैसी समस्याएं देखी गई है. चूंकि आज महिलाएं ओवर द काउंटर मिलने वाली गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन बिना डॉक्टर से पूछे कर रही हैं इसलिए आज के समय में महिलाएं में प्रेगनेंसी से जुड़ी कई कॉम्प्लिकेशंस बढ़ गई हैं. इसलिए इसे इसका उपयोग सोच-समझकर बैकअप की स्थिति में ही करना चाहिए न कि बार-बार क्योंकि ये महिलाओं में मोटापे की भी एक बड़ी वजह है. जिसके अपने कई अन्य साइड इफेक्ट्स है. इसलिए इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श के बाद तभी करें जब अन्य सभी प्रकार विफल हो गए हैं.

गर्भनिरोधक गोलियों के साइड इफेक्ट्स

1. जी मिचलाना

2. उल्टी करना

3.थकान

4.चक्कर आना

5. सिरदर्द

6.पेट के निचले हिस्से में दर्द या ऐंठन

7. स्तनों में दर्द या कोमलता

8. भारी मासिक धर्म ब्लीडिंग जैसे लक्षण शामिल हैं.

इसके अलावा आपको इसके उपयोग के एक हफ्ते बाद ब्लड स्पॉटिंग हो सकती है, साथ ही आपकी अगली माहवारी पहले या देर से हो सकती है. इसलिए इसका उपयोग जब भी करें एक बार अपनी डॉक्टर से जरूर बात करें, इन दवाओं को ओवर द काउंटर खरीदकर इस्तेमाल न करें.

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