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ग्रामीणों के लिए वन है जीविकोपार्जन का साधन: मेश्राम मुनगा सहित अन्य फलदार पौधे व सब्जी बीजों का निःशुल्क वितरण

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मयंक सोनी
भानुप्रतापपुर। पश्चिम वनमंडल के अंतर्गत कापसी, पूर्व परलकोट, पश्चिम परलकोट एवं कोयलीबेड़ा वन परिक्षेत्र में शनिवार को मुख्य वनसंरक्षक कांकेर के मार्गदर्शन एवं आरसी मेश्राम वनमंडलाधिकारी पश्चिम वनमंडल भानुप्रतापपुर के नेतृत्व में वन कर्मचारी व ग्रामीणों के साथ मिलकर मुनगा सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इसके अलावा ग्रामीणों को घर के आंगन, बाड़ी व खेत के मेड़ों में लगाने हेतु पौधे सहित सब्जी एवं फलों के बीज का वितरण किया गया। वही सीडबाल योजना के तहत जंगल के खुले क्षेत्रों में विभिन्न प्रजातियों के बीज का छिड़काव भी किया गया।
इस संबंध में वनमण्डलाधिकारी श्री मेश्राम ने बताया कि प्रदेश सरकार की महती मुनगा योजना के तहत पूरे राज्य में मुनगा पौधा रोपण किया जा रहा है। मुनगा पोष्टिक होने के साथ ही शरीर के लिए बहुत लाभदायक भी है। जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह से वन विभाग के नर्सरी में तैयार किये गये मुनगा सहित अन्य प्रजातियों के पौधें का निशुल्क वितरण स्कूल, आंगनबाड़ी, शासकीय कार्यालय सहित आम लोगो के लिए किया जा रहा है। वन कर्मचारियों के द्वारा स्थल पर जाकर पौधे लगाने में लोगो की सहायता भी की जा रही साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्र के रहवासियों के लिए जंगल केवल निस्तारी के लिये ही नही अपितु लोगो के जीविकापार्जन का प्रमुख साधन भी है। कोरोना काल मे शासन द्वारा चलाये गए वनधन योजना लोगो के लिये कारगर साबित हुई है। क्षेत्र में वनोपज संग्रहित कर लोग अच्छी आमदनी प्राप्त किये है। इस मामले में पश्चिम वनमंडल प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही है। जंगल पर अधिक ध्यान देना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगो को भी वनोपज का लाभ मिल सके। इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को कोरोना वायरस के बचाव व सुरक्षा हेतु जानकारी भी दिया गया। इस अवसर पर अशोक दानी एसडीओ पूर्व कापसी, दिनेश तिवारी रेंजर कापसी, हीरा सिह उइके रेंजर कोयलीबेड़ा, आरसी यादव रेंजर पूर्व परलकोट, शंकर दास रेंजर पश्चिम परलकोट, सीताराम पुडो जनपद सदस्य, धनंजय शर्मा, वनकर्मी व ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

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साय कैबिनेट की बैठक 19 जून को

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रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक 19 जून बुधवार को अपराह्न 3:00 बजे महानदी भवन, मंत्रालय में आयोजित होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में तेन्दूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक राशि का नगद भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। इन जिलों में बैंकों की शाखाएं दूर-दूर हैं, इसलिए मुख्यमंत्री ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को यह निर्देश जारी किए हैं। सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों के हाट-बाजारों में कैम्प लगाकर तेन्दूपत्ता संग्राहकों को वर्ष 2024 में पारिश्रमिक राशि का नगद भुगतान किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशों के परिपालन में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश मंत्रालय से जारी कर दिए गए हैं। सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों के अलावा अन्य जिलों में तेन्दूपत्ता संग्राहकों को उनके खाते में पारिश्रमिक राशि का भुगतान किया जाता है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही. श्रीनिवास राव ने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि समस्त नगद भुगतान की कार्यवाही जिला कलेक्टर के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण में सम्पन्न की जाएगी। नगद भुगतान के लिए कौन से संग्राहक पात्र होंगे, इसका निर्धारण कलेक्टर द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक प्रकरण का नगद भुगतान कलेक्टर की अनुमति से होगा। प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर तथा वन मंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक, जिला यूनियन द्वारा आपसी समन्वय से प्रस्तावित क्षेत्र के अंतर्गत हाट बाजार या अन्य उपयुक्त स्थान पर कैम्प का आयोजन कर संबंधित संग्राहकों को तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्ड में उचित प्रविष्टि कर नगद भुगतान करते हुये पावती प्राप्त करेंगे। नगद भुगतान के पूर्व पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाएगा तथा नगद भुगतान से संबंधित समस्त कार्य की संपूर्ण वीडियोग्राफी करते हुए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। संबंधित जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में उपरोक्त कैम्प के दौरान संग्राहकों को आवश्यकतानुसार आधारकार्ड जारी करने, बैंक खाता खुलवाने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस हेतु सी.एस.सी. स्थानीय बैंक आदि से आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाएगा। संग्राहकों द्वारा प्राप्त बैंक खाता विवरण के अनुरूप संग्राहक सर्वेक्षण साफ्टवेयर तेन्दूपत्ता पेमेंट साफ्टवेयर में आवश्यक पंजीयन आदि जिला यूनियन तथा सी.एस.सी. के माध्यम से कराया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। संग्राहकों को पारिश्रमिक राशि के भुगतान की कार्यवाही 15 दिन के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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स्कूल खुलने से पहले स्कूल बसों का निरीक्षण

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बेमेतरा :  हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले किया गया। जिला परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के द्वारा किया गया। इस निरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। बसों की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और ड्राइवरों के लाइसेंस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा वाहन के चालकों एवं परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों की ब्रेक, टायर, लाइटिंग सिस्टम, और इमरजेंसी एग्जिट की स्थिति का बारीकी से परीक्षण किया गया। साथ ही, फर्स्ट ऐड किट और अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया गया। ड्राइवरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें उन्हें यातायात नियमों और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के बारे में जानकारी दी गई। जिला परिवहन अधिकारी अरविंद भगत ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कुल 95 वाहन कार्यालय में उपस्थित हुए। सभी 95 वाहनो में प्राथमिक चिकित्सा पेटी पायी गई।

91 वाहनों में अग्नि शमन यंत्र पाया गया। सभी 95 वाहनों में स्पीड गवर्नर पिट पाए गए। 92 वाहनों में फिटनेस सर्टिफिकेट वैध पाया गया एवं 3 में फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता समाप्त होना पाया गया। 92 वाहन मे बीमा वैध पाया गया। 75 वाहनों में प्रदूषण प्रमाण पत्र पाये गये एवं 20 वाहनों के द्वारा पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। सभी 95 वाहनों में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ पाया गया। सभी 95 वाहनों में जीपीएस लगा हुआ पाया गया। 90 वाहनों में परमिट वैध पाए गए। 3 वाहनों में परमेट की वैधता समाप्त होना पाया गया एवं 2 वाहनों में परमिट नहीं पाये गये। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 33

वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस बार निरीक्षण में कुछ बसों में मामूली खामियां पाई गई, जिन्हें तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। जो बसें मानकों पर खरी नहीं उतरीं, उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया है। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। निरीक्षण अभियान के सफल समापन के बाद, अब सभी स्कूल बसें नए शिक्षा सत्र के लिए तैयार हैं, और प्रशासन ने विश्वास दिलाया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। जिन वाहनों में कमी पाई गई एवं जो वाहन किसी कारणवश प्रस्तुत नहीं किए जा सके उन्हें एक हफ्ते के अंदर सुधार कर जिला परिवहन कार्यालय में प्रस्तुत करने हेतु विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया गया।

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आकाशीय बिजली की चपेट में आने से युवती की मौत

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कांकेर :  कांकेर जिले के नरहरपुर क्षेत्र के थानाबोड़ी गांव में सोमवार को तेज आंधी-तूफान और गरज-चमक के साथ जमकर बारिश हुई। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने से बाड़ी में काम कर रहे एक युवती की मौत हो गई। जबकि 4 मजदूर घायल है। जिनका नरहरपुर स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। दरअसल, जिले में सोमवार सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए हुए थे। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। नरहरपुर के थानाबोड़ी के हल्बा गांव निवासी हृदयराम की बाड़ी में काम चल रहा था। इसी दौरान बारिश होने पर मजदूर पेड़ के नीचे खड़े हो गए। अचानक आकाशीय बिजली गिरने से मजदूर युवती तामेश्वरी सिन्हा की मौके पर मौत हो गई, जबकि चार मजदूर घायल हो गए। जिन्हें 108 के माध्यम से नरहरपुर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां घायलों का इलाज जारी है। फिलहाल घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।

 

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