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बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मित्तल निपान इंडिया द्वारा पेशा कानून के उल्लंघन व अवैध लौह अयस्क अवक्षेप का भंडार आदिवासियों की निजी जमीन पर करने के विरोध में बस्तर आयुक्त को बस्तर अधिकार संयुक्त मुक्ति मोर्चा ने सौपा ज्ञापन …….केंद्रीय खनिज मंत्री से बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मित्तल निपान इंडिया के लीज को निरस्त करने की मांग की  

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रायपुर । बस्तर अधिकार संयुक्त मुक्ति मोर्चा ने दंतेवाड़ा जिले के किरन्दुल में स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मित्तल निपान इंडिया द्वारा पेशा कानून के उल्लंघन व अवैध लौह अयस्क अवक्षेप का भंडार दिये गये स्थान से निश्चित स्थान से अलग स्थान पर किये जाने पर कार्रवाई हेतु केंद्रीय खनिज मंत्री के नाम बस्तर कमिश्नर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया । इस ज्ञापन के माध्यम से बस्तर अधिकार संयुक्त मुक्ति मोर्चा के बोमड़ाराम मंडावी,नवनीत चांद सहित मोर्चा के सभी पदाधिकारी ने बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मित्तल निपान इंडिया पर आरोप लगाया कि यह कंपनी किरन्दुल से लगे ग्राम बेंगपाल में स्थानीय आदिवासियों की निजी भूमि पर 30 से 40 फीट गड्ढा कर लौह अयस्क परिवहन के पश्चात बचे हुये केमिकल युक्त अवशेष पदार्थों का अवैध भंडारन किया जा रहा है। जिससे स्थानीय निवासी गंभीर संक्रमण से ग्रस्त हो रहे हैं व उनकी हजारों एकड़ भूमि पर उपजाउहीन होकर बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि बस्तर संभाग में संविधान की पांचवी अनुसूची के प्रावधान के साथ साथ पेशा कानून लागू है। जिसके तहत खनिज संपदा के दोहन व उत्खनन व भंडारण हेतु राज्य सरकार के अधिसूचना के पश्चात प्रभावित ग्राम पंचायतों की ग्राम सभा के अनुमति के अनुरूप ही उपभोक्ता को माइनिंग नियमों एवं शर्तों के अधीन उपभोग करने की अनुमति देने का प्रावधान है। लेकिन उक्त कंपनी द्वारा वर्तमान में सभी नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। किरंदुल से विशाखापट्टनम तक सेलेयरी पाइपलाइन बिछाकर शबरी नदी के पानी का उपयोग करते हुये परिवहन किया जाता है। तत्पश्चात केमिकल युक्त लौह अवशेषों को शासन द्वारा आवंटित लीज क्षेत्र से बाहर जाकर अवैधानिक रूप से निजी भूमि पर 30 से 40 फीट गड्ढा खोद का भंडारण किया जा है। जो की पूरी तरह से पेसा कानून व माइनिंग नियमों का उल्लंघन है। बस्तर अधिकार संयुक्त मुक्ति मोर्चा ने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की है कि बस्तर में स्थित कंपनी के गैर कानूनी कार्यो की जांच करवाकर लीज निरस्त करने की कार्रवाई की जाये। एवं बस्तर अधिकार संयुक्त मुक्ति मोर्चा के दस संभागीय एव॔ पांच स्थानीय जिला के सदस्यों को जांच दल के रूप में स्थान का मुवायना करने की अनुमति प्रदान की जाये। इस दौरान बस्तर अधिकार संयुक्त मुक्ति मोर्चा के सभी सदस्य मौजूद रहे।

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रायपुर में लाखों की शराब पर चला बुलडोजर

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रायपुर :  बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने जप्त अवैध शराब को नष्ट किया। जिले के थानों- चौकी में दर्ज 1001 प्रकरणों में कुल 11587. 768 लीटर जब्त शराब की बोतलों को बुलडोजर चलाकर कुचला गया। इन मामलों में जप्त वाहनों को भी राजसात किया जा रहा है। रविवार दोपहर पुलिस कैंप लाहोद में यह कार्रवाई की गई।

जबलपुर में डेढ़ करोड़ की शराब पर चला था बुलडोजर जबलपुर में डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की शराब पर रोड रोलर चला दिया गया। बुधवार को एक लाख 47 हजार लीटर शराब को 10 ट्रकों में भरकर खमरिया थाना क्षेत्र के लोहकरी गांव के जंगल में ले जाया गया। इसके बाद गड्‌ढा खाेदकर इसे नष्ट किया गया। जिस शराब को नष्ट किया गया, वह जिले के 36 थानों से इकट्‌ठा की गई थी। इसे पुलिस ने आबकारी एक्ट के तहत जब्त किया था। इसे कोर्ट के निर्देश पर ही नष्ट किया गया है। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम लोहकरी में पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग के अफसर मौजूद रहे। टीम ने पहले जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदा। इसके बाद कच्ची शराब को गड्ढे में बहा दिया गया। वहीं, अंग्रेजी शराब को रोड रोलर से नष्ट किया गया। कार्रवाई से पहले मौके पर कलेक्टर दीपक आर्य और एसपी आदित्य प्रताप सिंह भी पहुंचे।

एएसपी सूर्यकांत शर्मा का कहना है कि शराब नष्ट करने को लेकर कलेक्टर दीपक आर्य ने कमेटी का गठन किया था। इसमें सहायक जिला आबकारी अधिकारी रविन्द्र मानिकपुरी, डिप्टी कलेक्टर और एएसपी शामिल थे। एएसपी शर्मा ने बताया कि जिले के सभी थाना प्रभारियों से कहा गया था कि कोर्ट के निर्देश पर जिन थानों में रखी शराब को नष्ट करना है, उसकी सूची कमेटी के सामने लाएं। 36 थानों के थाना प्रभारियों ने शराब को लेकर लिस्ट बनाई। सहायक आबकारी आयुक्त रविन्द्र मानिकपुरी ने बताया कि कोर्ट के निर्देश पर जिस शराब को नष्ट किया गया है, उसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए है। शराब को पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई करते हुए जब्त किया गया था। सहायक आबकारी आयुक्त ने बताया कि अगले महीने फिर शराब नष्ट करने की बड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी तैयारी की जा रही है।

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गांव के खेत में तेंदुआ, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

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कोरबा  : जिले के कटघोरा वन मंडल की ऐतमा वन परिक्षेत्र के ग्राम कोनकोना में एक तेंदुआ खेत में टहलते और आराम करते नजर आया। ग्रामीणों की नजर तेंदुआ पर पड़ी तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी। बताया जा रहा है कि तेंदुआ गर्मी के चलते हीट स्ट्रोक का शिकार हो गया था। सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने घंटो मशक्कत बाद के तेंदुआ को पकड़ा गया। जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण लगभग सुबह 9 बजे खेत में काम करने जा रहे थे। इस दौरान अचानक उनकी नजर पड़ी और वह डरे सहमे वापस गांव पहुंचे और इसकी जानकारी गांववालों को दी गई। घटना की सूचना पर कटघोरा डीएफओ निशांत कुमार ने खुद मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम रेस्क्यू शुरू किया गया, लेकिन तेंदुआ इधर से उधर टहलते हुए नजर आ रहा था।

इसकी सूचना बिलासपुर कानन पेंडारी की टीम को भी दी गई जहां वह तत्काल मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू शुरू किया। घंटो मशक्कत बाद के तेंदुए को पकड़ा गया और उसे पशु चिकित्सा के माध्यम से बेहोश किया गया। जिसके वन विभाग और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। इस संबंध में कटघोरा डीएफओ निशांत कुमार ने बताया कि बिलापसुर कानन पेंडारी आई हुई टीम में डॉक्टर को भी बुलाया गया था। तेंदुआ भीषण गर्मी के चलते हीट स्ट्रोक का शिकार हो गया है और बीमार है। इसके चलते वह आराम से चल फिर रहा था। बिलासपुर से टीम बुलाकर तेंदुए को पकड़ा गया है जहां उच्च अधिकारी को निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही कटघोरा वन परिक्षेत्र के एतमा नगर में तेंदुआ के हत्या का मामला सामने आया था जिसमें पिता-पुत्र समेत एक अन्य आरोपी को कटघोरा वन विभाग ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार वन विभाग इस इलाके में तेंदुए पर नजर रखी हुई थी। वन विभाग ने निगरानी के लिए जगह-जगह कैमरे लगाए हैं।

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सर्वआदिवासी समाज ने पुलिस पर लगाया फर्जी मुठभड़े का आरोप

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जगदलपुर/कांकेर  :  कांकेर जिले के टेकामेटा गांव में रविवार को सर्व आदिवासी समाज का दल पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गए चार आदिवासियों के परिवार से मिलने पहुंचा था। इसमें प्रमुख रूप से सर्व आदिवासी समाज की ब्लॉक उपाध्यक्ष मैनी कचलाम, अजीत नुरूटी, केय कोरचा, कन्ना वड्डे, सोनसाय तिम्मा, सुरेश मेट्टामी, पेकाराम मेट्टामी, मंगेश वेड़दा, आंदेबाई कोवाची समेत बड़ी संख्या आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे। इस बीच पांच गांवों से आए हुए ग्रामीणों से बातचीत कर मैनी कचलाम ने छत्तीसगढ़ सरकार पर आदिवासियों को फर्जी मुठभेड़ में मारने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले आदिवासी जो अपने घऱ परिवार के साथ गांव में रहते है। उन्हें माओवादी बताकर मारना गलत है, जबकि सरकार को माओवादी और आदिवासियों में फर्क करना चाहिए।

आदिवासी अपनी जरूरतों की पुर्ती के लिए जंगल जाते हैं और सुरक्षा बलों के द्वारा फर्जी मुठभेड़ में नक्सली बताकर मार दिया जाता है। वहीं, सर्व आदिवासी समाज के छोटेबेठिया सर्कल के अध्यक्ष अजीत नुरूटी ने कहा कि नक्सली के नाम पर गोली मार दिये गए चारों आदिवासियों के परिवारों को आज देखने वाला कोई नहीं है। घऱ में कमाने वाले लोगों को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मार दिया। जबकि ये लोग काकुर गांव में गोटा पंडुम मनाने के लिए गए हुए थे। उन्होंने सरकार से इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मारे गए बेगुनाह आदिवासियों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

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