
7 दिसम्बर 2024:- सुबह बासी लार को मुंहासों पर लगाने से वह ठीक हो जाते हैं. आयुर्वेद में लार को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. इससे पूरी बॉडी बैलेंस रहती है. मुंह सूखे तो हमेशा पानी पीने की सलाह दी जाती है. यही नहीं सुबह खाली पेट पानी भी पीने को कहा जाता है ताकि लार पेट में पहुंचे. दरअसल लार में ऐसे कई बैक्टीरिया, एंटीबॉडीज और एंजाइम होते हैं जो सेहत को दुरुस्त रखते हैं.
लार में क्या होता है
लार को सलाइवा भी कहते हैं. लार मुंह के सलाइवरी ग्लैड में बनती है. इसमें पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स, म्यूकस, प्रोटीन और एमिलेज और लाइसोजाइम नाम के एंजाइम होते हैं. लार में मौजूद एमिलेज एंजाइम खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को ब्रेकडाउन करता है जबकि लाइसोजाइम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. लार में मौजूद एंटीबॉडीज शरीर को बाहरी बैक्टीरिया से दूर रखती है. म्यूकस और प्रोटीन मुंह में लुब्रिकेशन यानी चिकनाहट बनाए रखते हैं जिससे खाना पेट में जाकर पच जाता है.
खाली पेट पानी पीना क्यों चाहिए
बहुत से लोगों को सुबह उठते ही चाय चाहिए होती है. सुबह खाली पेट चाय पीना पेट की समस्या कर सकता है. आयुर्वेद आचार्य डॉ. एस.पी. शर्मा कहते हैं कि सुबह चाय पीने की जगह एक गिलास पानी पीना चाहिए. इससे बासी लार पेट में पहुंचती है जिसमें अच्छे एंजाइम पेट में पहुंचते हैं और पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाते हैं. जो लोग सुबह खाली पेट पानी पीते हैं , उन्हें गैस, ब्लोटिंग, अपच या लूज मोशन की दिक्कत नहीं होती.
मुहांसे, फोड़े-फुंसियां होती ठीक
लार में एंटीसेप्टिक जैसे गुण होते हैं जिससे मुंहासे, दाने, दाद या फुंसियां दूर होती हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ एम्स्टर्डम में हुई स्टडी के अनुसार सलाइवा में लाइसोजाइम एंजाइम पिंपल्स को ठीक करता है. दरअसल मुहांसे तभी होते हैं जब स्किन हद से ज्यादा ऑयली हो, रोम छिद्र बंद हो जाए या एक्ने करने वाला बैक्टीरियल त्वचा में मौजूद हों. लार स्किन को बैक्टीरिया फ्री बनाती है और रोम छिद्र को खोलती है. स्किन की इंफ्लामेशन को कम करती है जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं. वहीं, नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की स्टडी के अनुसार जब भी कोई इंफेक्शन होता है तो स्किन एसिडिक हो जाती है जबकि सलाइवा का पीएच एल्कलाइन होता है जिससे स्किन का पीएच बैलेंस हो जाता है. इंसानों की लार में ऐसे कई प्रोटीन होते हैं जिससे घाव तक ठीक हो जाते हैं.
ओरल हेल्थ अच्छी रहती है
सलाइवा से खाने का टेस्ट तो पता चलता ही है लेकिन इससे ओरल हेल्थ भी अच्छी रहती है. लार में मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन, पोटैशियम दांतों के लिए सुरक्षाकवच बनते हैं जिससे दांत सड़ने से बचते हैं और इंफेक्शन दूर रहता है. इससे मसूड़े भी मजबूत बनते हैं. इसके अलावा लार से मुंह में बदबू भी नहीं आती. सलाइवा खाने के कणों को और बैड बैक्टीरिया को खत्म करता है. हालांकि जिन लोगों की लार अच्छे से नहीं बनता है, उनके मुंह से बदबू आती रहती है.
डार्क सर्कल हो जाते हैं गायब
लार से आंखों के नीचे दिखने वाले डार्क सर्कल्स का भी इलाज होता है. सुबह इन काले धब्बों पर बासी लार मलने से स्किन का रंग पहले जैसा हो जाता है. लार से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार जिन लोगों की आंखें ड्राई रहती हैं, अगर वह बासी लार लगाएं तो ड्राईनेस की समस्या दूर होती है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
हमारा शरीर किसी भी बीमारी से तभी बच पाता है, जब हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत हो. सलाइवा से इम्यूनिटी मजबूत बनती है. दरअसल मुंह में म्यूकस की लेयर होती है. यह लेयर बाहरी बैक्टीरिया को शरीर से दूर रखती है. वहीं सलाइवा में प्लाज्मा बी सेल होते हैं जो एंटीबॉडी बनाते हैं. यह एंटीबॉडी म्यूकस लेयर को मजबूती देती है. वहीं, सलाइवा खाने में मौजूद कुछ चीजों को पहचान लेता है जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे लार हमारे इम्यून सिस्टम को दबा देती है. इस रिएक्शन से भले ही गले में या मुंह में एलर्जी हो जाए लेकिन बॉडी को नुकसान नहीं पहुंचता.