
यूरोप और अमेरिका में पहले से ही वजन कम करने वाली दवा का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन भारत में पहली बार माउनजारो नाम से लॉन्च हुआ है. अमेरिकी मल्टीनेशनल फार्मा कंपनी इली लिली ने माउनजारो को भारतीय मार्केट में उतारा है. इसके लिए भारतीय दवा नियामक की ओर से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. विदेश में नोवो नॉर्डिस्क कंपनी की दवा वीगोवी बहुत ज्यादा पॉपुलर है. भारत में मोटापा और डायबिटीज दोनों बहुत बड़ी चुनौती है और यह दोनों बीमारी का एक साथ कई लोग शिकार हैं. ऐसे में माउनजारो का आना लाखों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो सकती है.
कितनी होगी उम्मीद
इली लिली ने भारत में इसकी कीमत 50 डॉलर रखी है. यानी 5 एमजी के एक इंजेक्शन की कीमत 50.67 डॉलर होगी. अगर इसे रुपये में बदल दिया जाए यह 4375 रुपये होगा. वहीं 2.5 एमजी के एक इंजेक्शन की कीमत 40.54 डॉलर यानी 3500 रुपये होगी. अगर किसी एक व्यक्ति को 5 एमजी वाली इस दवा को लेनी हो तो उसे हर महीने 16 हजार रुपये खर्च करने होंगे. हालांकि यह कीमत इंश्योरेंस के आधार पर भी तय होती है. बेशक इसकी कीमत ज्यादा हो लेकिन इसकी मांग बहुत ज्यादा है क्योंकि भारत में तेजी से लोग मोटापा और डायबिटीज से परेशान हैं. ऐसे में कीमत शायद ही कोई देखें.
माउनजारो कैसे काम करता है
इंडियन एक्सप्रेस की खबर में डॉ. मनीषा अरोड़ा बताती हैं कि माउनजारो दो हार्मोन का नकल करता है. ग्लूकागॉन लाइक पेप्टाइड GLP-1और गैस्ट्रिक इनहिबट्री पोलीपेप्टाइन GIP का नकल करता है. ये दोनों हार्मोन ब्लड शुगर को रेगुलेट करता है, भूख को दबाता है और पाचन को स्लो करता है. इससे मरीज को पेट भरा हुआ महसूस होता है. माउनजोरो दोनों हार्मोन का काम करता है जबकि विदेश में जो वजन कम करने वाली दवा ओजेंपिक बिक रही है वह सिर्फ जीएलपी 1 को निशाना बनाती है.
किसे है इस दवा की जरूरत
कोई भी वयस्क जिसे टाइप 2 डायबिटीज है वह डॉक्टरों की सलाह से इस दवा को ले सकते हैं. वही जो लोग ज्यादा वजन के शिकार हैं उनके लिए भी यह दवा कारगर है. जिन लोगों को मोटापा और डायबिटीज दोनों की समस्या है, उन लोगों के लिए यह दवा तो रामबाण की तरह काम करेगी. हालांकि इस दवा को सिर्फ डॉक्टरों की सलाह से ही लेनी चाहिए. दूसरी ओर गर्भवती महिलाएं, टाइप 1 डायबिटीज के मरीज, पैनक्रिएटिक कैंसर और थायरॉयड कैंसर के मरीज और गैस्ट्रो की गंभीर बीमारी वाले मरीजों के लिए यह दवा नहीं है. इससे नुकसान होगा.