Home मनोरंजन महेश भट्ट ने अजय देवगन के बर्थडे पर लिखी दिल की बात?

महेश भट्ट ने अजय देवगन के बर्थडे पर लिखी दिल की बात?

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Mumbai:- 90 के दशक की शुरुआत में ही हिंदी सिनेमा को एक ऐसा एक्टर मिला जो अपनी आंखों से भी बहुत कुछ बयां कर देता है. 22 साल की उम्र में उसने फिल्मी दुनिया में कदम रखें और पहली ही फिल्म से वो स्टार बन गया. फिर सुपरस्टार का तमगा भी पाया. खास बात ये है कि आज 33 साल बाद भी उसका वो सटरडम बरकरार है. यहां बात हो रही है अजय देवगन की जो आज 56 साल के हो गए हैं. जन्मदिन के खास मौके पर अजय को फैंस और सेलेब्स विश कर रहे हैं. वहीं दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट ने भी बॉलीवुड के ‘सिंघम’ को खास अंदाज में जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं. अजय को बर्थडे विश करते हुए महेश भट्ट ने अपने दिल की बात लिखी है. उनके अभिनय के साथ ही उनके व्यक्तित्व की भी जमकर तारीफ की.

अजय देवगन के लिए महेश भट्ट ने लिखीं ये बातें

समय नदी की तरह बहता है, बिना रुके और बिना थके और आज है 2 अप्रैल, 2025. आज एक ऐसी शख्सियत का जन्मदिन है, जिसे कभी स्टारडम के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ी, फिर भी वो इसके लिए सबसे प्रतिभाशाली लोगों में से एक रहा है. अजय सिर्फ एक अभिनेता नहीं हैं, वो एक मौजूदगी हैं, एक शांत शक्ति जिसने बॉलीवुड को इस तरह से आकार दिया है, जैसा कि ऊंची आवाजें और चमकती रोशनी कभी नहीं कर सकती. वो ध्यान खींचने की कोशिश नहीं करते. वो सच्चाई की तलाश करते हैं, अपनी एक्टिंग में, अपने रिश्तों में, उन कहानियों में, जिन्हें वह बताना चाहते हैं.

धूल और सपनों में बना एक बंधन

अजय के साथ मेरा रिश्ता सिर्फ सिनेमा के बारे में नहीं है, यह जीवन के बारे में है. यह उस समय से है जब उनके पिता वीरू देवगन और मैं सिर्फ दो युवा थे, जो फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. हम दोनों ही उस समय कुछ नहीं थे, लेकिन हमारे सपने उस शहर से कहीं बड़े थे, जिसमें हम रहते थे. वीरू, निडर और जोशीला, एक्शन की भाषा को फिर से लिख रहा था. मैं, बेचैन और भूखा, उन कहानियों को बताने की कोशिश कर रहा था जो मेरे भीतर जल रही थीं.

नहाते हुए साइन की थी जख्म

और फिर जख्म (1998) थी. मुझे अभी भी वह कॉल याद है. मैं जल्दी में था, वो चेन्नई में नहा रहा था. मैंने उसे फिल्म के बारे में बताया. कोई दलील नहीं, कोई समझाने की कोशिश नहीं, बस कहानी की सच्चाई. और बिना किसी हिचकिचाहट के, उन्होंने कहा, “मैं इसे कर रहा हूं.” कोई शर्त नहीं. कोई बातचीत नहीं. जब जख्म ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया, तो मैं समझ गया कि वो क्या सोच रहे थे. अपने बारे में नहीं, अपने अभिनय के बारे में नहीं, बल्कि उस बच्चे (एक्टर कुणाल खेमू) के बारे में जिसने उनके बचपन का किरदार निभाया था. उन्होंने कहा था, ”कुणाल ने ही मेरी एक्टिंग को गहराई दी. वो ही नेशनल अवॉर्ड के हकदार थे.

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